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TURAKHIA BROTHERS : दोनों भाई करते थे पूरे दिन कोडिंग, 16 साल की उम्र मे खड़ी की करोड़ों की कंपनी

“हर कोई जन्म से ही किसी ना किसी काम में Champion होता है. बस पता चलने की देर होती है I”

SUCCESS STORY OF TURAKHIA BROTHERS : व्यक्ति की किस्मत के बारे मे कहा जाता है की वह कब बदल जाए इसके बारे मे कोई भी कुछ नहीं कह सकता. इसलिए मनुष्य को बिना व्यर्थ की चिंता किए अपना काम जारी रखना चाहिए. आज की यह कहानी मुंबई के दो सगे भाइयों की सफलता के बारे मे है जिन्होंने बहुत कम उम्र में ही व्यवसाय जगत (BUSINESS COMMUNITY) में सफलता प्राप्त करते हुए एक अनोखा उदाहरण पेश किया.

ये दोनों भाई वर्तमान समय मे चार्टेड प्लेन मे घूमते है ओर  दुनिया की सबसे महंगी गाड़ियों का शौक भी रखते है यही नहीं करोड़ों रुपये के आलिशान बंगले में रहने वाले इन भाइयों की गिनती आज देश के सबसे रईस लोगों में होती है. दिव्यांक तुरखिया और भाविन तुरखिया इन इन भाइयों को भारतीय ऐड टेक (AID TECH) जगत की सबसे बड़ी हस्ती के रूप में पहचाना जाता है. इन दोनों भाइयों ने अपने डेढ़ दशक के छोटे से करियर में लगभग एक दर्जन कंपनियां खड़ी की ओर उनमे से पांच कंपनियों को इन्होंने बेच डिया ओर ये आज भारत के सबसे अमीर लोगों की सूची में शामिल हैं.

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TURAKHIA BROTHERS

TURAKHIA BROTHERS का बचपन ओर शिक्षा (EDUCATION)

दिव्यांक तुरखिया (DIVYANK TURAKHIA) और भाविन तुरखिया (BHAWIN TURAKHIA) दोनों भाई Media Dot Net Startup के फाउंडर्स हैं ओर आज देश के दिग्गज कारोबारी में से एक हैं. इन दोनों भाइयों का जन्म मुंबई मे हुआ. मुंबई में एक मध्यम-वर्गीय परिवार में पैदा लिए तुरखिया भाइयों का बचपन जुहू और अंधेरी इलाकों में बीता. इनके पिता पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट है ओर इनकी माँ समजसेविका है.

दिव्यांक को बचपन से ही कंप्यूटर से एक खास किस्म का लगाव था. किन्तु दिव्यांक के परिवार के लिए उन दिनों मे एक कम्प्यूटर खरीदना आसान नहीं था क्योंकि उनका परिवार यह खर्च उठा पाने की स्थिति मे नहीं था. किन्तु दोनों भाइयों ने इसका तोड़ ढूंढ लिया ओर वो अपने अमीर दोस्तों के कम्प्यूटर से कोडिंग सीखने लगे. दिव्यंक ने महज 9 वर्ष की उम्र में ही बेसिक्स में प्रोग्रामिंग सिखनी शुरू कर दी. बीतते समय के साथ उनकी रुचि भी लगातार इसमें बढ़ती चली गई.

दिव्यांक का दिमाग बहुत तेज था ओर उन्होंने बहुत ही छोटी उम्र में उन तकनीक की बारीकियों को बड़ी ही आसानी से सिख लिया था, जिसे सीखने में एक साधारण युवा को वर्षों लग जाते हैं. ओर सबसे खास बात यह है यह सब उन्होंने किताबों की मदद से सीखा था. दिव्यांक के पिता को अलग-अलग किताबे पढ़ने का शौक था. इसलिए उन्होंने उनके घर में ही किताबों की लाइब्रेरी बना रखी थी. इस वजह से दिव्यांक के घर पर पढ़ने के लिए हर विषय की किताबें उपलब्ध थीं.

दिव्यांक को भी बचपन से ही अलग-अलग विषयों की किताबें पढ़ना पसंद था. वो हर विषय की किताबों को पढ़कर जानकारी एकत्र किया करते थे. वे इन किताबों को पढ़ने के बाद उसमे बताई गई जानकारी पर प्रैक्टिकल करते हुए उसे इस्तेमाल में लेते और सीखते थे. दिव्यांक ने इसी जानकारी के दम पर महज 13 वर्ष की उम्र में अपने भाई भाविन के साथ मिलकर एक स्टॉक मार्केट सिमुलेशन गेम तैयार किया, इनके द्वारा बनाया गया यह गेम स्टॉक मार्केट की कीमतों पर नजर रख सकता था.

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TURAKHIA BROTHERS

कंप्युटर मे बढ़ती रुचि से टूटा पढ़ाई से नाता

दिव्यांक की रुचि दिनों-दिन कंप्यूटर में बढ़ती जा रही थी ओर इसी वजह से उनका पढ़ाई से नाता भी वक्त के साथ टूटता चला गया. हालांकि उन्होंने अपने पिता के दबाव में आकर बी.कॉम के लिए एडमिशन तो ले लिया किन्तु ये कभी कॉलेज नहीं जाते थे. दोनों भाई मिलकर पूरे दिन घर पर ही कोडिंग करते रहते थे. इस तरह से इन्हे कोडिंग मे महारत हासिल हो गई ओर कोडिंग मे जबरदस्त पकड़ बनाने के बाद इन भाइयों ने अपना बिजनेस शुरू करने की योजना बनाई. किन्तु इनके सामने अपना बिजनेस शुरू करने में सबसे बड़ी बाधा या रही थी की वे इसके लिए शुरूआती पूंजी की व्यवस्था कैसे करे.

बिजनेस के लिए रुपयों की व्यवस्था करने के लिए दोनों भाइयों ने किसी तरह अपने पिता को मनाया और उनके बहुत मनाने पर साल 1998 में उनके पिता उन्हे 25 हजार रूपये कर्ज के रूप में देने के लिए राजी हो गए. जब उन्होंने अपने पिता से ये रुपये उधार लेकर अपना काम शुरू किया तो उस वक़्त इन दोनों भाइयों ने काभी भी नहीं सोचा था कि वे 16 साल बाद विश्व के अरबपति क्लब में शामिल हो जाएंगे. दिव्यांक  तुरखिया ने मात्र 16 साल की उम्र में अपने 18 साल के भाई भाविन तुरखिया के साथ मिलकर अपने पिता द्वारा दिए गए पैसो से वेबसाइट के डोमेन नाम देने वाली एक कंपनी डायरेक्टी की स्थापना की. उनके द्वारा स्थापित यह कंपनी डायरेक्टी भारतीय कंपनियों को वेबसाइट्स और इंटरनेट सर्विसेज मुहैया कराती थी. बाद में आगे चलकर इनकी इसी कंपनी के बैनर तले ‘बिगरॉक’ (BIGROCK) का जन्म हुआ, जो की वर्तमान समय मे एक अग्रणी डोमेन रजिस्ट्रर कंपनी (DOMAIN REGISTRER COMPANY) है.

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TURAKHIA BROTHERS

11 स्टार्टअप्स शुरू कर चुके है TURAKHIA BROTHERS

इसके बाद साल 2001 में दोनों भाइयों ने मिलकर एक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम बनाया. दोनों भाई डायरेक्टी के बैनर के तहत अब तक कुल 11 स्टार्टअप्स शुरू कर चुके हैं. मौजूदा दौर में इनके द्वारा स्थापित डायरेक्टी ग्रुप के 1,000 से ज्यादा कर्मचारी और 10 लाख से ज्यादा ग्राहक हैं. इनके द्वारा स्थापित कंपनी की ग्रोथ सालाना 120 फीसद की दर से बढ़ रही है. कुछ वर्ष पहले ही तुरखिया ब्रदर्स (TURAKHIA BROTHERS) ने एंड्युरेंस इंटरनेशनल ग्रुप को 1 हजार करोड़ रुपए में अपने द्वारा स्थापित 4 ब्रांड बेचे थे. इन्होंने गूगल को टक्कर देने के लिए मीडिया नेट एड सेंस को बनाया था. वर्तमान समय मे इस प्रोडक्ट के लाइसेंस कई पब्लिशर्स, एड नेटवर्क और इंटरनेशनल एड टेक कंपनियों के पास है. आज इनके द्वारा बनाई गई मीडिया नेट न्यूयॉर्क, लॉस एंजिल्स, दुबई, ज्यूरिख, मुंबई और बेंगलौर से काम करती है ओर  इसमें 1400 कर्मचारी काम करते हैं. मीडिया नेट की नेटवर्थ 400 मिलियन डॉलर से अधिक है.

कुछ वर्ष पहले ही दोनों भाइयों ने अपना ऑनलाइन ऐडवर्टाइजिंग वेंचर मीडिया.नेट (MEDIA.NET) को एक चाइनीज समूह के हाथों 90 करोड़ डॉलर में बेच दिया. इस डील के द्वारा उन्होंने गूगल (75 करोड़ डॉलर में ऐडमोब को खरीदा) और ट्विटर (35 करोड़ डॉलर में मोपब को खरीदा) को भी पीछे छोड़ दिया. तुरखिया ब्रदर्स (TURAKHIA BROTHERS) के पास इंजीनियरिंग की डिग्री नहीं होने के बावजूद भी दोनों भाई बेहतरीन कोडर हैं. इन भाइयों ने ख़ुद की मेहनत ओर दिमाग के दम पर बिना किसी की सहायता लिए इतना बड़ा साम्राज्य खड़ा कर दिया. आज इन दोनों तुरखिया भाइयों को फर्स्ट इंडियन इंटरनेट आत्रप्रेन्योर्स के रूप में जाना जाता है.

ओर एक बात ओर आप इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों को शेयर करे ताकि लोग इससे प्रेरणा ले सके. 

तो दोस्तों फिर मिलते है एक और ऐसे ही किसी प्रेणादायक शख्शियत की कहानी के साथ…

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