GYANI GURU CHARAN SINGH : 12000 रुपए से शुरू हुई एक छोटी सी दुकान, आज पूरी दिल्ली में है अपने स्वाद की वजह से फ़ेमस

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GYANI GURU CHARAN SINGH

“खामोशी से की गई मेहनत एक दिन जरूर शोर मचाती है.”

SUCCESS STORY OF GYANI GURU CHARAN SINGH : हमारे देश में एक कहावत बहुत ज़्यादा प्रसिद्ध है “एक शानदार भोजन बिना किसी मिठाई के बिल्कुल अधूरा लगता है” आज की सक्सेस स्टोरी में हम जिस आपके लिए शख्स की कहानी लेकर आये हैं, उन्होंने अपनी मिठाई की मिठास के द्वारा एक शानदार बिज़नेस की शुरुआत कर उसे आगे बढ़ाते हुए पूरे दिल्ली को अपने स्वाद का ग़ुलाम बना लिया है.

ज्ञानी गुर चरण सिंह (GYANI GURU CHARAN SINGH) हमारे आज सक्सेस स्टोरी के प्रेरक व्यक्तित्व हैं. इन्होंने भारत में एक रिफ्यूजी पाकिस्तान के तौर पर लायलपुर से आकर दिल्ली में शरण ली और अपनी मेहनत ओर स्वाद की कारीगरी के दम पर मिलियन डॉलर का कारोबार खड़ा कर लिया. इनका नाम लगभग सात दशकों से दिल्ली वालों की ज़ुबान पर उनकी मिठाई की मिठास का ज़ायका बनकर आज भी रचा-बसा है.

चाँदनी चौक में छोटी सी दुकान से की शुरुआत

ज्ञानी गुर चरण सिंह जी ने भारत में शरण लेने के बाद साल 1956 में चाँदनी चौक में एक छोटी सी दुकान से अपने काम की शुरुआत की. शुरुआत में वे अपनी दुकान पर सिर्फ़ एक आइटम – रबड़ी-फालूदा ही बेचा करते थे. उनके दुकान पर मिलने वाले रबड़ी-फ़ालूदा के दवाड के कारण ही उनकी यह दुकान जल्द ही बहुत मशहूर हो गई.

दिल्ली के पुराने बाज़ार में जो लोग खरीददारी करने आते, वे चाहे शहर के हो या फिर गांव से आने वाले सभी, उनकी दुकान से बिना रबड़ी-फालूदा खाये वापिस नही जाते थे. अपने बिज़नेस के लगातार बढ़ते चलन को देखकर उन्होंने अपने मेनू कार्ड का विस्तार करने का सोचा और उसमें मिल्कशेक, हलवा, और आइसक्रीम को भी साथ में जोड़ दिया और इस प्रकार से उनकी दूकान एक परफेक्ट स्वीट-शॉप में बदल गई.

उनकी दुकान में लोगों को सबसे ज़्यादा पसंद आने वाली उनकी क्रीमी आइसक्रीम थी जो बहुत ही सस्ती और टेस्टी थी और इसी वजह से यह मध्यम-वर्गीय लोगों में बहुत प्रसिद्ध हुई. इस प्रकार से ज्ञानी गुर चरण सिंह बहुत जल्द ही दिल्ली वालों (मिठाई ) की नब्ज़ पकड़ने में कामयाब रहे.

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1962 में उन्होंने अपनी दुकान का विस्तार करने के लिए पहली मशीन खरीदी, वह भी सेकंड-हैण्ड जिसकी लागत उस समय 12,000 रुपये की थी जो की उस समय उनके लिए एक बहुत बड़ा निवेश था. कुछ समय बाद में ही भारतीय अर्थव्यवस्था में एक बड़ा परिवर्तन आया और आर्थिक विकास की एक नई लहर, नई समृद्धि की शुरुआत हुई.

समय के साथ स्वयं को करते रहे अपडेट

जब भारत में भी इस वजह से पश्चिम स्टाइल में शॉपिंग मॉल का चलन शुरू हुआ तब उन्होंने यह महसूस किया कि नए ग्राहकों तक पहुँचने के लिए उन्हें भी नए तरीके की जरुरत है और तब उन्होंने वक्त की ज़रूरत को पहले ही भांपते हुए बस्किन रोब्बिन्स की तर्ज पर ज्ञानीज आइसक्रीम स्टोर्स की नींव रखी.

ज्ञानी गुर चरण सिंह जी ने समय के साथ-साथ स्वयं को भी बदलना शुरू किया. उन्होंने हमेशा नए ग्राहकों को लुभाने के लिए अपने प्रोडक्ट के साथ कुछ नए प्रयोग भी किये. उन्होंने इम्पोर्टेड मशीन इटली से ज़रूर मँगवाई परंतु उसके बावजूद दूध अपने पुराने किसान साझेदारों से ही लेते रहे.

यह समय ऐसा था जब मंदी के दौर ने अच्छे से अच्छे लोगों की भी कमर तोड़ कर रख दी थी. लेकिन इसके बावजूद ज्ञानी जी ने अपने स्मार्ट सोच से उस चुनौती को भी अपने लिए एक सुनहरे मौके में बदल दिया. उस समय मंदी की वजह से दुकानो का किराया भी बहुत कम हो गया था और यही उनके लिए सही समय था दिल्ली के पॉश इलाके में भी अपने कदम रखने का और बड़े लोगों को अपने स्वाद से लुभाने का.

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गुरप्रीत ने किए बिजनेस में संगठनात्मक परिवर्तन

गुरप्रीत जो की इस समय इंग्लैंड के यूनिवर्सिटी ऑफ़ लीड्स से एमबीए करने के बाद अपना फैमिली बिज़नेस चला रहे हैं. उन्होंने अपने इस बिजनेस में बहुत सारे संगठनात्मक परिवर्तन किये हैं और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपनी पहुँच बड़ाने के लिए फ्रेंचाइजी सिस्टम को भी अपनाया है.

इससे पहले वे सिर्फ़ मिल्कशेक, हलवा और रबड़ी-फालूदा के लिए मशहूर थे किंतु अब वह 38 तरह के स्वाद वाले आइसक्रीम (GIANI), फलों के शेक और आइसक्रीम सोडा के लिए भी मशहूर हो गए है. ओर इसी वजह से आज उनका टर्नओवर कई करोड़ रुपयों में है.

“अधिकतर लोगों को ऐसा लगता है कि फैमिली बिज़नेस करना किसी भी व्यक्ति के लिए बहुत ही आसान है पर मैं ऐसा बिलकुल नहीं मानता. लोगों की उम्मीदें आपसे बहुत ज्यादा होती हैं और आपका एक गलत निर्णय प्रतिकूल प्रभाव डालता है. लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए अब चुनौतियाँ भी पहले से काफ़ी बढ़ गई हैं. बाज़ार में अपने आप को बनाये रखने के लिए और प्रतिस्पर्धा की लड़ाई में पहले से बहुत सारी चुनौतियाँ हैं.”

गुरप्रीत

गुरप्रीत ने अपने पिता से बिज़नेस को चलाने के बहुत सारे गुर सीखे हैं. वे अब आइसक्रीम भी बनाते हैं और उसके थोक विक्रेता भी हैं. कड़ी मेहनत और लगन में विश्वास करने वाले गुरप्रीत यह बात अपने दिल से महसूस करते हैं कि असफलता अस्थाई होती है और किसी काम में समर्पण करने से जो व्यक्ति को जो मिलता है वह सही मायने में स्थाई सफलता होती है.

ज्ञानी गुर चरण सिंह जी की यह सफलता हमें यह बताती है कि कैसे आप बुनियादी सिद्धान्तों के साथ विपरीत हो रही बाहरी स्थितियों के ख़िलाफ़ खड़े हो सकते हैं और अपनी सफलता की विरासत आगे भी जारी रख सकते हैं.

ओर एक बात ओर आप इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों को शेयर करे ताकि लोग इससे प्रेरणा ले सके.

तो दोस्तों फिर मिलते है एक और ऐसे ही किसी प्रेणादायक शख्शियत की कहानी के साथ…

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