SAURAV MODI : 8000 रुपये की मामूली रकम से की शुरुआत, आज है करोड़ों का टर्नओवर

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SAURAV MODI

“Luck का तो पता नहीं लेकिन अवसर जरूर मिलती है मेहनत करने वालों को I”

SAURAV MODI SUCCESS STORY : हमारे समाज मे एक अच्छी-खासी नौकरी करने वाले व्यक्ति को सफल माना जाता है किन्तु अगर मे आपसे कहू कि कोई व्यक्ति अपनी कॉर्पोरेट की नौकरी को छोड़कर कुछ नया करने के बारे मे सोचे तो आप मे से ज्यादातर लोग उस व्यक्ति को मूर्ख कहेगे.     

लेकिन आज की हमारी कहानी के मुख्य किरदार बेंगलुरु के रहने वाले 23 साल के सौरव मोदी (SAURAV MODI) ने बिलकुल ऐसा ही किया ओर अपनी कॉर्पोरेट की जॉब को छोड़ते हुए अपने आइडिया पर काम करते हुए बिजनेस में हाथ आजमाने की कोशिश की और वर्तमान समय मे वे एक सफल कारोबारी है.

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SAURAV MODI का बचपन ओर EDUCATION

सौरव मोदी का जन्म बेंगलुरू के एक मिडिल क्लास फैमिली मे हुआ था ओर इन्होंने अपनी 12 वीं तक की शिक्षा वही से प्राप्त की. स्कूल की शिक्षा के बाद सौरव ने क्राइस्ट कॉलेज से कॉमर्स मे अपना ग्रेजुएशन कम्प्लीट किया.

सौरव के ग्रेजुएशन कम्प्लीट होने के बाद ये अपनी आगे की पढ़ाई के लिए यूएस जाकर वहा से एमबीए करना चाहते थे किन्तु इनके आर्थिक हालत को देखते हुए यह मुमकिन नहीं था इसलिए इन्होंने अर्न्स्ट एंड यंग कंपनी में टैक्स एनालिस्ट की नौकरी ज्वाइन कर ली और वहां पर इन्होंने लगभग डेढ़ साल नौकरी करते हुए गुजारे किन्तु इस नौकरी मे इनका मन नहीं लगा ओर इन्होंने आखिर एक दिन नौकरी छोड़ दी.

सौरव ने नौकरी छोड़ने के बाद अपने पिता के साथ उनके बिज़नेस मे हाथ बंटाना शुरू कर दिया. किन्तु यहा पर भी उनका मन नहीं लगा ओर दो साल तक पिता के साथ काम करने के बाद कुछ नया करने की चाह में इन्होंने अपने पिता का बिज़नेस भी छोड़ दिया. इनके द्वारा इस तरह से बिजनेस छोड़ने पर इनके पिता ने इनके इस निर्णय का सम्मान किया क्योंकि वे स्वयं भी एक सेल्फ-मेड पर्सन थे.

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माँ से 8000 रुपये उधार लेकर शुरू किया बिजनेस

सौरव ने अपने पिता से अलग होते हुए कुछ अलग करने का तो सोचा था किन्तु इन्हे कुछ समझ नहीं आ रहा था की वे क्या शुरू करे, ऐसे मे इन्हे परेशान देखकर एक दिन इनके पिता ने इन्हे सुझाव दिया की क्यों न वे जुट के बिजनेस मे अपना हाथ आजमाए. पिता द्वारा इन्हे दिए गए इस सुझाव के पीछे का कारण यह था की उस समय बेंगलुरू मे एक भी जुट प्रोडक्शन की कंपनी नहीं थी.

अपने पिता द्वारा दिए गए आइडिया पर सोचने के बाद आखिर सौरव ने अपने बिज़नेस को शुरू करने के लिए अपनी माँ से 8000 रूपये का कर्ज लिया. इन रुपयों मे से सबसे पहले इन्होंने 1800 रुपये की एक सेकंड-हैण्ड सिलाई मशीन खरीदी और एक पार्ट टाइम टेलर को अपने यहा नौकरी पर रखते हुए एक 100 स्क्वायर फीट के किराये के गेराज से अपने इस बिज़नेस जस्ट जुट (JUST JUTE) की शुरुआत की.

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पिता के कस्टमर से मिला पहला ऑर्डर

बिजनेस की शुरुआत करते ही इनके पिता के एक कस्टमर के द्वारा इन्हे पहला ऑर्डर 500 बैग बनाने का भी मिल गया अपने शुरुआती समय मे इनका सबसे बड़ा ऑर्डर 70000 रुपये का एककैंडल एक्सपोर्टर से मिला जिसके बाद इनके बिजनेस ने रफ्तार पकड़ ली ओर धीरे-धीरे इनके पास ऑर्डर आने शुरू हो गए ओर इस प्रकार से सौरव का बिजनेस बढ़ने लगा.

ऐसा नहीं है कि सौरव को सफलता आसानी से मिल गई हो बल्कि इनके लिए बिजनेस का शुरुआती दौर काफी मुश्किलों ओर चुनौतियों से भरा था. वर्ष 2007 मे सौरव बहुत ही मुश्किल दौर से गुजर रहे थे, क्योंकि इनके यहा पर काम करने वाले 30 वर्कर ने एकाएक ही स्ट्राइक कर दी परंतु सौरव इस कठिनाई से घबराए नहीं ओर अपने साहस और मजबूत इच्छाशक्ति के बल पर हर चुनौती का डटकर सामना किया ओर आज इनके पास करीब 100 से ज्यादा काम करने वाले लोग हैं और आज इनकी यह फैक्ट्री जस्ट जुट (JUST JUTE) बेंगलुरु के कामाक्षीपाल्या में 10,000 स्क्वायर फीट के क्षेत्रफल में फैली हुई है.

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पत्नी ने बंटाया बिजनेस मे हाथ

सौरव का विवाह वर्ष 2008 निकिता नाम की एक लड़की से हुआ, निकिता भी डिज़ाइनिंग बैकग्राउंड से ताल्लुक रखती थी और अपने इसी इंटरेस्ट के चलते निकिता ने भी सौरव के साथ इनके इस बिज़नेस को आगे बढ़ाने में अपनी पूरी मदद की. वर्तमान समय मे सौरव के इस जूट बिज़नेस में विस्तृत कलेक्शन के हैंडबैगस, स्लिंग्स, वॉलेट्स, लैपटॉप बैग्स, और ऐसे बहुत सारे अन्य जरूरत के प्रोडक्ट्स हैं.

इसके अलावा सौरव ओर निकिता ने नया एक्सपेरिमेंट करते हुए कुछ ऑर्गेनिक कॉटन और पोल्यूरेथेन जैसे फैब्रिक्स के साथ प्रयोग करके भी बहुत सारे प्रोडक्ट्स बनाये हैं. सौरव ने अपने इस बिज़नेस जस्ट जूट के लिए लक्ष्य निर्धारित किया है ओर इस लक्ष्य के तहत इन्होंने आने वाले दस सालों में अपनी कंपनी के टर्नओवर को लगभग 100 करोड़ से भी ज्यादा बढ़ाने का सोच रखा है.

ओर एक बात ओर आप इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों को शेयर करे ताकि लोग इससे प्रेरणा ले सके.

तो दोस्तों फिर मिलते है एक और ऐसे ही किसी प्रेणादायक शख्शियत की कहानी के साथ…

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