SHASHANK DIXIT : ऐयरपोर्ट पर रात बिताते हुए घर-घर जाकर अपना प्रोडक्ट बेचा, आज सालाना 250 करोड़ का कर रहे कारोबार

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SHASHANK DIXIT

“आपका लक्ष्य कुछ भी हो, आपकी मेहनत और आपकी खुदी ही आपको उस लक्ष्य तक पहुंचाती है.”

SHASHANK DIXIT : अक्सर हमारे देश में ऐसे बहुत कम लोग ही होते है जो एक मध्यम-वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद भी अपनी हैसियत से बहुत अधिक बड़ा लक्ष्य चुन लेते है. ऐसे लोगों के अपने लक्ष्य तक पहुचने के सफ़र में कई प्रकार की कठिनाइयाँ ओर बाधाए ज़रूर आती है किंतु अगर इंसान इनके सामने हार न माने तो इन सबके बावजूद अपने लक्ष्य तक ज़रूर पहुँचता है.

शशांक दीक्षित (SHASHANK DIXIT) भी एक मध्यम-वर्गीय परिवार से आते थे किंतु उन्होंने अपने जीवन में बड़ा लक्ष्य रखा था ओर उन्हें इस बात का अच्छी तरह से अनुमान था की उनके इस रास्ते में भी कई तरह की बाधाए ज़रूर आएगी किंतु वे पहले से इनका सामना करने के लिए तैयार थे. इसीलिए कॉलेज के अंतिम वर्ष में ही उन्होंने अपने स्टार्ट-अप के एक नए आइडिया के साथ अपनी शुरूआत कर दी.

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SHASHANK DIXIT ने तीन दोस्तों के साथ मिलकर बनाया सॉफ़्टवेयर

शशांक दीक्षित ने अपने तीन दोस्तों सोमेश मिश्रा, ब्रजेश सचान, और परितोष महाना के साथ मिलकर अपनी कॉलेज के अंतिम वर्ष (Last Year) में ही लोकल आउटलेट के लिए एक सॉफ्टवेयर बनाया जो की उनके कॉलेज कैंपस के पास ही था.

2008 में उन्होंने आईआईटी (IIT) से अपना ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद अपना सॉफ्टवेयर “डेस्कएरा”  (deskera) लांच कर दिया. उनके द्वारा बनाया गया यह सॉफ्टवेयर अधिकतर छोटे बिज़नेस के एकाउंट्स को सम्भालने के लिए काम करता है.

शशांक दीक्षित द्वारा बनाए गए इस सॉफ्टवेयर का आइडिया तो काफ़ी हद तक ठीक था परन्तु छोटे स्तर पर एकाउंट्स और भी छोटे ही होते हैं. इसलिए कुछ बिजनेस उनके द्वारा बनाए गए “डेस्कएरा” सॉफ्टवेयर को अधिक प्रधानता नहीं देते हैं. डेस्कएरा सॉफ्टवेयर को शशांक और उनकी टीम ने शुरू किया था.

उन्होंने 2012 में अपने इस बिज़नेस को भारत से सिंगापुर ले जाने का फैसला लिया. सिंगापुर जाने से पहले उन्होंने इस बारे में रीसर्च किया जिसमें उन्हें यह महसूस हुआ कि यह देश नए आइडियाज और बिज़नेस का दूसरे देशों के मुक़ाबले अधिक खुले दिल से स्वागत करता है.

सिंगापुर एक शहर-राष्ट्र होने के बावजूद भी ERP (ENTERPRISE RESORSE PLANNING) का कम प्रचलन होने के कारण उन्हें उनके इस सॉफ़्टवेयर के लिए बेहतर अवसर प्रदान करता था.

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ऐयरपोर्ट पर सोते हुए घर-घर जाकर बेच सॉफ़्टवेयर

शुरूआती दिनों में शशांक दीक्षित ने सिंगापुर में घर-घर जाकर अपने सॉफ्टवेयर को बेचा और अपनी लागत को कम करने के लिए उन्होंने सिंगापुर चांगी एयरपोर्ट पर ही सोते हुए रातें गुज़ारने का निर्णय लिया. सिंगापुर GST का पालन बहुत ही कड़ाई के साथ करता है इस वजह से शशांक दीक्षित के सॉफ़्टवेयर की वहाँ पर मांग बढ़ने लगी.

सिंगापुर के बिज़नेसमेन ने दोनो हाथों से उनके सॉफ़्टवेयर “डेस्क-एरा” को स्वीकार किया जिससे शशांक दीक्षित को उस समय अपने बिज़नेस को बढ़ाने में मदद मिली. उनके इस बिज़नेस को सिंगापुर की सरकार के द्वारा भी बहुत अधिक समर्थन प्राप्त हुआ. तीन साल बाद मलेशिया ने भी अपने देश में GST लागू किया और उसी के साथ जल्द ही डेस्क-एरा ने वहाँ पर भी अपना विस्तार कर लिया.

बहुत सारी बाधाओं का सामना करते हुए आज डेस्क-एरा ने विश्वपटल पर अपना एक नया मुक़ाम हासिल कर लिया है. वर्तमान समय में इसमें लगभग 300 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं और इसका वार्षिक टर्न-ओवर 26  मिलियन डॉलर हो गया है.

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सिंगापुर, मलेशिया,इंडोनेशिया सहित भारत के आठ शहरो में है ऑफ़िस

शशांक दीक्षित की कंपनी के ऑफिस सिंगापुर, मलेशिया और इंडोनेशिया के साथ-साथ भारत के आठ शहरों में भी अपनी सेवाएं दे रहा है. भारत में भी GST लागू हो जाने के बाद से ही डेस्क-एरा ने भारत में भी पाँव पसारने शुरू कर दिया.

अगस्त 2016 में डेस्क-एरा पहला ऐसा क्लाउड-बेस्ड सर्विस-प्रोवाइडर बना जिसने भारत में GST-रेडी सॉफ्टवेयर सुइट का प्रस्ताव रखा. शशांक दीक्षित, जिन्हे किसी समय अपने स्टार्ट-अप को सामने लाने में कई प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ा क्योंकि वे एक मध्यम-वर्गीय परिवार से आते हैं.

तमाम तरह की बाधाओं के बावहड उन्हें अपने आइडिया पर पूरा विश्वास था और इसी विश्वास के कारण वे डेस्क-एरा जैसे वेंचर की शुरूआत कर पाए. शशांक दीक्षित के अनुसार आज सभी देशों में स्टार्ट-अप के लिए कई सारे अवसर उपलब्ध हैं और सभी बिजनेस और स्टार्ट-अप आइडियाज को बढ़ावा दे रहे हैं.

ओर एक बात ओर आप इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों को शेयर करे ताकि लोग इससे प्रेरणा ले सके.

तो दोस्तों फिर मिलते है एक और ऐसे ही किसी प्रेणादायक शख्शियत की कहानी के साथ…

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