SHAMBHAVI SINHA : कैसे एक साधारण लड़की ने  दुकानदारों को एकजुट करते हुए खड़ा किया 20 करोड़ का कारोबार

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SHAMBHAVI SINHA

“यदि आपके भीतर कुछ करने का जुनून हो तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता”  

SUCCESS STORY OF SHAMBHAVI SINHA : आपने अगर अपने आस-पास के लोगों को ध्यान से देखा हो तो यह ज़रूर देखा होगा कि ज्यादातर लोग सफल होने के लिये अपने आस-पास समाज में प्रचलित तरीकों को ही अपनाते हैं क्योंकि हर ब्यक्ति कुछ नया करने से डरता है की कही वह उस काम में फैल न हो जाए ओर इस वजह से कोई भी व्यक्ति रिस्क नहीं लेना चाहते.

किंतु कुछ लोग ऐसे होते है जो किसी और के बनाए रास्ते पर चलने की बजाय अपना रास्ता स्वयं बनाते है ओर धारा के विपरीत दिशा में तैरते हुए अपने आत्मविश्वास के बल पर कुछ अलग ओर ऐसा करने की सोचते हैं जो पहले कभी भी किसी ने नही किया हो और अपनी लगन और कुछ कर गुजरने की चाह में के कारण वे उसमें कामयाब भी होते हैं.

ऐसा ही कुछ अलग करते हुए आने वाली युवा पीढ़ी के सामने सफलता की मिशाल पेश करने वाली नोएडा की रहने वाली संभवी सिन्हा (SHAMBHAVI SINHA) के बारे में आज की सक्सेस स्टोरी में बताने जा रहे है जिन्होंने अपने आउट ऑफ़ बॉक्स सोच के मध्याम से आज ऑनलाइन शॉपिंग की परिभाषा को ही बदल कर रख दिया है.

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SHAMBHAVI SINHA

SAMBHAVI SINHA ने भारत आने का निर्णय लिया

संभवी सिन्हा ने यूनिवर्सिटी ऑफ़ वर्जीनिया से गणित और कॉमर्स में स्नातक की डिग्री लेने के बाद साल 2013 में भारत आने का फ़ैसला लिया. जब वे भारत वापिस आइ तो उन्होंने इस बात को बहुत क़रीब से महसूस किया कि भारतीयों द्वारा कुछ भी इलेक्ट्रॉनिक या महंगा सामान खरीदते वक़्त दिमाग में हज़ारों सवाल आते हैं

जैसे –

  • “सामान किस दुकान से लिया जाए?
  • क्या यह दुकानदार समां महँगा तो नहीं दे रहा है?
  • यह समां ऑनलाइन आर्डर करना अच्छा रहेगा या नहीं?
  • अगर ऑनलाइन ख़रीदा तो ऐसा तो नहीं होगा की जो सामान खरीद रहे है वह घर आने पर वैसा न हो जैसा दिखाया गया है?
  • इन सवालों पर काफ़ी विचार करने के बाद संभवी सिन्हा के दिमाग में एक बिज़नेस आइडिया आया.

संभवी सिन्हा ने सोचा कि वे क्यों न एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाए जिस पर सामान की बुकिंग तथा मोलभाव तो ऑनलाइन हो लेकिन उपभोक्ता उस सामान की खरीददारी अपनी पसंद की किसी भी नज़दीकी दुकान से कर ले. उनकी यह सोच नई होने के साथ-साथ ऑनलाइन शॉपिंग के दायरे में आते हुए भी परम्परागत ऑनलाइन शॉपिंग से बिलकुल अलग थी.

संभवी सिन्हा की माने तो

“उन्हें अपनी सोच पर पूरा भरोसा था लेकिन इस बात की हिचकिचाहट ज़रूर थी कि कंपनी खोली जाए या नहीं”

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संभवी सिन्हा में मार्केटिंग रीसर्च के साथ बिजनेस को समझा

अपनी इसी सोच को वास्तविकता में बदलने के लिये उन्होंने पहले कुछ महीने तक मार्केटिंग रिसर्च करने के साथ में बिज़नेस की समझ ली और जून 2015 में अपनी कंपनी “शॉपमेट“ की शुरुआत कर दी. शॉपमेट की स्थापना करने के बाद उनके सामने सबसे बड़ा चैलेंज यह था की वे कैसे दुकानदारों के एक बड़े नेटवर्क को कंपनी के साथ जोड़े?

सांभवी सिन्हा को इसके साथ-साथ दुकानदारो को यह बात भी समझानी थी कि ऑनलाइन के इस दौर में उनकी दुकानों पर भीड़ कम हो गयी है ओर उसका असर उनकी कमाई पर भी पड़ रहा है, ऐसी स्थिति में अगर शॉपमेट उनकी मदद ऑनलाइन आर्डर लेने के बाद ग्राहक को उनकी दुकान पर भेज देगा तो उनकी कितनी बड़ी मदद होगी.

इस पूरी प्रक्रिया के बदले में हर समान की बिक्री पर वह उनसे नाम मात्र का कमीशन लेगी जो की 2 से 3 प्रतिशत होगा. यह काम सांभवी और उनकी टीम बहुत ही कम समय में हक़ीक़त में कर दिखाया ओर इस प्रकार देखते ही देखते बहुत ही कम समय में दिल्ली और एनसीआर के 700 दुकानदार उनकी कंपनी से जुड़ गये.

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दुकानदारो के साथ ग्राहकों में पैदा हुआ भरोसा

संभवी सिन्हा के इस मॉडल से दुकानदारों को तो फायदा हुआ ही इसी के साथ में ग्राहकों में किसी भी प्रकार की ठगी की आशंका का डर भी चला गया. संभवी सिन्हा के कभी न हार मानने वाले इसी जज़्बे के कारण 1 करोड़ की शुरूआती पूंजी से शुरू होने वाली कंपनी का टर्नओवर एक साल के भीतर ही 20 करोड़ का हो गया है.

आज इनकी कंपनी सभी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम, बाइक, स्कूटर, मोबाइल, टेबलेट, लैपटॉप और डेस्कटॉप कंप्यूटर में डील करती है. संभवी सिन्हा के द्वारा व्यवसाय जगत में की गई एक नई पहल और उसका सफल क्रियान्वन, आज सभी युवा इंटरप्रन्योर्स के लिए प्रेरणा का स्रोत है.

एक व्यक्ति किसी भी व्यवसाय में सफल हो सकता हैं, लेकिन इसके लिए सबसे खास बात यह है कि सफल होने के लिए उसे अपने भीतर रिस्क लेने की क्षमता विकसित करनी होगी. आपके पास एक ऐसा आइडिया अवश्य होना चाहिए जो यूनिक हो और उससे भी बड़ी बात कि उस पर आपका पूरा विश्वास हो.

ओर एक बात ओर आप इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों को शेयर करे ताकि लोग इससे प्रेरणा ले सके.

तो दोस्तों फिर मिलते है एक और ऐसे ही किसी प्रेणादायक शख्शियत की कहानी के साथ…

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