RENUKA ARADHYA : मुसीबतों के चक्रवाती तूफान से निकल कर खड़ी की अपनी सफलता की इमारत

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RENUKA ARADHYA

“सफलता हमेशा एक प्रयास और मांगती है”

RENUKA ARADHYA SUCCESS STORY : इस पंक्ति को सच कर दिखाया है आज की कहानी के जाबांज़ खिलाडी रेणुका आरध्य (RENUKA ARADHYA) ने जिन्होंने जीवन में मुसीबतो का ऐसा चक्रवाती तूफान झेला जहा उन्हें एक के बाद एक असफलताए मिलती गयी. लेकिन उनके मजबूत इरादों के आगे आखिरकार मुसीबतो को भी नतमस्तक होना पड़ा और उन्होंने लिख डाली अपने संघर्ष की अमिट कहानी.

आज रेणुका 50 वर्ष से ज्यादा आयु के है, उनका संघर्ष उनके पैदा होते ही शुरू हो गया था जहा उन्हें पिता के साथ गली गली घूम कर जीवन यापन के लिए भीख भी मांगनी पड़ी थी.

RENUKA ARADHYA

RENUKA ARADHYA का बचपन ओर संघर्ष

रेणुका का जन्म कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के समीप स्थित गोपसांद्रा गांव में हुआ था. उनका परिवार मंदिर में पूजा-पाठ आदि कर अपना भरण-पोषण करता था जो की परिवार वालो के लिए पूरा नहीं होता था इसी वजह से उन्हें अपने बचपन में ही लोगो के घरो में जाकर एक नौकर की भांति काम भी करना पड़ा. अपनी दसवीं क्लास तक आते आते उन्हें पढाई के लिए एक बूढ़े अनाथ व्यक्ति के यहाँ भी काम करना पड़ा था.

इसके बाद आगे की पढाई हेतु उनके पिता ने उनका दाखिला पड़ोस के कस्बे में एक आश्रम में करवा दिया यहाँ भी उनके भूख का संघर्ष जारी रहा आश्रम में केवल दो वक़्त का खाना ही मिलता था जिससे रेणुका संतुष्ट नहीं होते थे इस वजह से सही से पढाई नहीं कर पाते और उनका रिजल्ट भी बेहद खराब रहा और वे फ़ैल हो गए, इसी बीच उनके पिता का निधन हो गया.

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जब RENUKA ARADHYA पर परिवार की ज़िम्मेदारी आई

अब पुरे परिवार की जिम्मेदारी का बोझ उन पर आ गया इसके लिए उन्होंने काम की तलाश शुरू की और नजदीक की फैक्ट्री में काम करने लगे वहाँ से वे प्लास्टिक और बर्फ बनाने वाली फैक्ट्री में भी काम किया इस तरह से उनका जीवन सफर कठिनाई से कटता रहा लेकिन बचपन से ही उनके मन में अपने लिए कुछ अलग करने और इन सभी मुसीबातों से निजात पाने की इच्छा थी.

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इसी क्रम में आगे बढ़ते हुए उन्होंने अपना खुद का एक बिज़नेस सूटकेस कवर का शुरू किया उन्हें लगा की कुछ बोझ हल्का हो जायेगा लेकिन हुआ इसका उल्ट उन्हें वहाँ भी किस्मत का साथ नहीं मिला और 30,000 का नुक्सान झेलना पड़ा. इस घटना ने उनके लिए “कोढ़ में खाज” का काम किया, उन्हें इससे आगे बढ़ते हुए एक बार फिर से नौकरी की जहा उन्हें सिक्योरिटी गार्ड की जॉब मिली यहाँ भी वे ज्यादा वक़्त नहीं बिता पाए.

पैसे उधार ले शुरू किया मोटर ड्राइविंग स्कूल

आखिर उन्होंने अपने जीवन को एक अलग दिशा में ले जाने के लिए कठिन निर्णय लेते हुए एक लक्ष्य का निर्धारण कर रिश्तेदारों से कुछ पैसे उधार लेकर मोटर ड्राइविंग स्कूल से कार चलना सिखने का मानस बनाया लेकिन हाय री किस्मत एक बार गाडी पार्क करते समय किसी से टक्कर हो गयी जहा उन्होंने जेब से पैसे भरकर नुक्सान उठाना पड़ा.

लेकिन वे अपना मन बना चुके थे तो हार ना मानते हुए लगातार ड्राइविंग प्रैक्टिस करते रहे फिर उन्हें नामी ट्रेवल कंपनी में ड्राइवर के रूप में टूरिस्ट व्हीकल चलाने का काम मिला जहा उन्हें विदेशी पर्यटकों से कुछ टिप्स भी मिल जाय करती थी वहाँ से पैसो को जोड़कर और बैंक से लोन लेकर खुद की ट्रेवल कंपनी “सिटी सफारी” की नीव रखी और पहले ही वर्ष में एक अन्य कार और खरीद ली उसी समय किस्मत का साथ मिला और एक अन्य कैब सर्विस की हालात खराब थी और वह अपनी कंपनी को जिसमे लगभग 40 कारे थी बेचना चाहता था रेणुका ने मौका न चूकते हुए 6 लाख में उस कंपनी को खरीद लिया.

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जब RENUKA ARADHYA का संघर्ष लाया रंग

किस्मत ने यहाँ से पलटना शुरू किया जो उन्हें फर्श से अर्श तक लेकर गया उसी समय अमेज़न इंडिया भी कैब सर्विस में कदम रखने के लिए भारत में संभावनाए तलाश रही थी. इसके लिए उन्होंने सिटी सफारी को प्रमोशन के लिए चुना. इसके बाद तो उन्होंने पीछे मुड़कर ना देखते हुए बड़े बड़े ब्रांड वालमार्ट, जनरल मोटर्स जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियाँ के साथ करार किया. 

आज की तारीख में उनके द्वारा स्थापित सिटी सफारी का वार्षिक टर्न ओवर लगभग 50 करोड़ से ज्यादा है जो 150 से ज्यादा लोगो को प्रत्यक्ष रोजगार भी दे रहा है महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रेणुका ने महिलाओ को भी ड्राइवर बनाने हेतु प्रोत्साहित किया जहा उन्हें खुद की कार खरीदने के लिए 50,000 की आर्थिक सहायता भी दी जाती है.

अंत में जाते जाते रेणुका आरध्य की स्टोरी हम सभी के लिए प्रेरणा है जहा किस्मत से लड़ते हुए आगे बढ़ा जाता है

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