DINESH AGARWAL : 40 हजार से 300 करोड़ तक का सफर, जानिए कैसे एक मामूली आइडिया ने बना दिया करोड़पति

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DINESH AGARWAL

“कई बार किसी व्यक्ति के द्वारा कुछ नया करने की चाह उसके पूरे जीवन को बदलकर रख देती है.”

SUCCESS STORY OF DINESH AGARWAL : आज की सक्सेस स्टोरी दूसरी स्टोरी से बहुत अलग होने वाली है क्योंकि ऐसा बहुत ही कम देखने को मिलता है कि एक सफल बिज़नेसमैन का बेटा अपने सफल करियर के साथ अपने पारिवारिक बिज़नेस को छोड़ते हुए सेल्फ-मेड इंटरप्रेन्योर बनने की चाहत रखता है.

आपने आज तक जितनी भी कहानियाँ पढ़ी होगी उनमे यही कहानी होती है की या तो एक बिजनेसमें का बेटा अपने फैमिली बिज़नेस में शामिल होने का रास्ता चुनता है या फिर वह अपने लिए एक आरामदायक नौकरी का चुनाव करता है.

लेकिन आज की हमारी कहानी के पात्र दिनेश अग्रवाल (DINESH AGARWAL) पैदा तो एक बड़े बिज़नेस परिवार में हुए किंतु इसके बावजूद उन्होंने कभी भी बिज़नेसमैन बनने के बारे में नहीं सोचा.

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DINESH AGARWAL का जीवन परिचय

दिनेश अग्रवाल, मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के नानपारा के रहने वाले है. उन्होंने हरकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल इंस्टिट्यूट, कानपूर से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री ली. ग्रैजूएशन करने के बाद उन्होंने पारिवारिक बिजनेस को सम्भालने की बजाय बहुत सी बड़ी-बड़ी कंपनियों में काम किया.

दिनेश अग्रवाल ने अपने करियर की शुरुआत CMC लिमिटेड में सेंट्रलाइज्ड रेलवे रिजर्वेशन सिस्टम प्रोजेक्ट में काम करते हुए की. उसके बाद उन्होंने C-Dot (सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ टेलीमैटिक्स) को ज्वाइन किया.

पांच साल तक इन कंपनियों में काम करने के बाद दिनेश अग्रवाल ने अमेरिका का रुख़ किया और अमेरिका में उन्होंने HCL टेक्नोलॉजीज़ में काम करना शुरू किया. अमेरिका में दिनेश अग्रवाल की ज़िंदगी बड़े ही आराम से कट रही थी ओर उनकी तनख्वाह, लाइफ के ऐशोआराम और सभी कुछ अच्छा था किंतु इसके बावजूद भी उन्हें अपने जीवन में कुछ कमी खल रही थी.

जब दिनेश अग्रवाल ने भारत लौटने का निर्णय लिया

अमेरिका में काम करने के दौरान उनके दिमाग में बस एक ही बात आ रही थी कि वे इस तरह से अपनी सारी ज़िंदगी सिर्फ़ काम करते हुए नहीं बिता सकते. वे एक समान जीवन जीते हुए अपनी उस नौकरी से ऊब चुके थे ओर अपनी ज़िंदगी में कुछ नया करना चाहते थे और इसके लिए एक नए अवसर की तलाश कर रहे थे.

वे दूसरी कंपनियो में काम करते हुए परेशान हो चुके थे ओर अब अपना खुद का बिज़नेस शुरू करना चाहते थे. अंत में उन्होंने काफ़ी सोच विचार करने के बाद अपना बिजनेस करने के इरादे से साल 1996 में फिर से भारत लौटने का निर्णय लिया.

दिनेश अग्रवाल के कम्प्यूटर एनालिस्ट होने की वजह से कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर में उनकी शुरू से ही अच्छी पकड़ थी और वे एकदम शुरूआती दौर से इंटरनेट के यूज़र भी थे. दिनेश अग्रवाल ने अपने इसी काम को आगे बढ़ाते हुए सॉफ्टवेयर सर्विसेज़ में ही कुछ नया शुरू करने का मन बनाया.

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इस तरह से शुरू हुआ INDIAMART

वे छोटे और मझोले एंटरप्राइजेज (SMEs) के लिए एक ऐसा कॉमन प्लेटफार्म बनाने के बारे में

सोच रहे थे जिससे वे सभी अपने उत्पाद से सम्बंधित सभी प्रकार की जानकारी वेब-पेजेज़ में आसानी के साथ डिस्प्ले कर सकें.

उन्होंने इसी विचार को केंद्र में रखते हुए सोचा की क्यों न एक ऐसा प्लेटफार्म बनाया जाय जहाँ पर SMEs अपने उत्पादों की मार्केटिंग भी कर सके. उन्होंने इस दिशा में शुरुआत करते हुए अपने इस बिज़नेस का नाम दिया इंडिया मार्ट (INDIAMART).

दिनेश ने अपने बिजनेस को शुरू करने के लिए अपनी बचत के 40,000 रुपये को अपनी कंपनी में इन्वेस्ट किया. किंतु अक्सर यह देखा गया है की किसी भी नए बिज़नेस की शुरूआत इतनी भी आसान नहीं होती और इनके साथ भी यही हुआ. इनके बिजनेस की शुरुआत के साथ ही इनके सामने एक बड़ी बाधा आ गई.

असल में इनके इस बिज़नेस में काम करने के लिए कम्प्यूटर का होना सबसे जरुरी था. और उस समय कंप्यूटर काफ़ी महंगे होते थे और इस वजह से बहुत ही कम बिज़नेस में उनका इस्तेमाल किया जाता था. दिनेश और उनकी टीम के लिए शुरुआत से ही सबसे चुनौतीपूर्ण काम था प्रमोशन हेतु अपने ग्राहकों को किसी भी तरह से कंप्यूटर खरीदने के लिए राजी करना.

INDIAMART की शुरुआती समस्याएँ

इसके अलावा इनके साथ बिज़नेस करने के लिए इंटरनेट कनेक्शंस का आवश्यक होना भी इनके बिजनेस के लिए एक बड़ी रूकावट थी. अंत में इनकी मेहनत का मीठा फल उन्हें अपना पहला क्लाइंट ‘फ़ास्ट फ़ूड चेन निरुलास’ के रूप में मिला था.

उस समय हमारे देश में इंटरनेट की स्पीड बहुत कम होती थी ओर छोटे-छोटे फाइल की उपलोडिंग और डाउनलोडिंग करने में भी बहुत अधिकि टाइम लग जाता था. उन्होंने इसका समाधान एक डील की जिसमें वे सालाना 32,000 रुपये में उनकी वेबसाइट को विकसित और मैनेज करेंगे.

उन्होंनें अपने बिजनेस के विस्तार के लिए ऐसे कर्मचारियों को चुना जो इनोवेटिव तरीके से उनकी मार्केटिंग करें. उन्होनें इंडिया मार्ट के प्रचार के लिए शुरुआत में नई दिल्ली के प्रगति मैदान में प्रदर्शनी लगाई जिसमें उनके स्टाफ के लोग टी शर्ट पहन कर अपने ब्रांड का प्रचार करते हुए दिखाई दे रहे थे.

इण्डिया मार्ट की ख़ासियत यह थी की उनके वेब-पेज पर जैसे ही किसी क्लाइंट का प्रोफाइल डाला जाता, पूरे विश्व से उस क्लाइंट के उत्पाद के लिए बिज़नेस एन्क्वाइरीज़ मिलना शुरू हो जाती थी.

इस प्रकार से बहुत ही कम समय में बहुत सारी कंपनियों ने वेब पर अपनी उपस्थिति के महत्त्व को समझना शुरू कर करते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई ओर उससे उन्हें तो फायदा मिला ही, साथ ही साथ इंडिया मार्ट को भी फायदा पहुंचा. इस तरह से पहले साल के अंत तक उनकी इस फर्म का टर्न-ओवर 6 लाख रूपये तक पहुंच गया. शुरुआत में उस समय उनकी कंपनी में सिर्फ नौ कर्मचारी ही कार्य कर रहे थे.

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INDIAMART का विस्तार

जैसे-जैसे इनका बिज़नेस बढ़ने लगा उसी के साथ ही इन्हें बड़ी जगह की ज़रूरत लगने लगी. 1996 से 1999 के दरम्यान उन्होंने चार बार अपनी कंपनी के ऑफिस बदल दिए. इनकी कंपनी में नए कर्मचारी रखने में भी खर्च ज्यादा आता था, क्योंकि कंपनी को अपने हर नए एम्प्लाई के लिए एक कम्प्यूटर और उसकी एक्सेसरीज भी ख़रीदनी होती थी ओर इसमें लगभग 1 सिस्टम का खर्च लगभग 50,000 था.

कुछ बिज़नेस को इनके द्वारा जानकारी ई-मेल के जरिये दे दी जाती थी परंतु कुछ बिज़नेस के लिए जानकारियां प्रिंटआउट निकाल कर फैक्स के माध्यम से भी ग्राहकों तक भेजा जाता था. इन वजहों से कंपनी का खर्च भी लगातार बढ़ रहा था.

इंडिया मार्ट के विस्तार के लिए दूसरा ऑफिस 1998 में मुंबई में स्थापित किया गया. 1999 तक इंडिया मार्ट के 1,000 क्लाइंट्स और 100 स्टाफ सदस्य भी हो गए थे. उनके स्टाफ की भी उनके बिज़नेस को बढ़ाने में बड़ी अहम भूमिका है.

इनकी कंपनी को 11 सितंबर 2001 को बड़ा झटका लगा जब यूनाइटेड स्टेट में आंतकी हमला हुआ तो इनका बिज़नेस 40% तक गिर गया था. किंतु बहुत जल्द ही इनकी कंपनी उस झटके से बाहर आ गई ओर आज देश के 20 शहरों में इंडिया मार्ट के 50 ऑफिसेस और 2500 से ज़्यादा स्टाफ मेंबर्स हैं.

इंडिया मार्ट के सिर्फ़ हेड ऑफिस नॉएडा में ही 800 कर्मचारी कार्य करते हैं. 2007 में इंडिया मार्ट ने अपने नए ऑफिस के लिए नॉएडा में लगभग दो एकड़ का प्लाट लिया था जिसकी कीमत सात करोड़ रूपये थी.

ओर एक बात ओर आप इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों को शेयर करे ताकि लोग इससे प्रेरणा ले सके.

तो दोस्तों फिर मिलते है एक और ऐसे ही किसी प्रेणादायक शख्शियत की कहानी के साथ…

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