IAS HARPREET SINGH : नौकरी के साथ की यूपीएससी की तैयारी, आखिरी अटेम्पट में बने IAS अधिकारी

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IAS HARPREET SINGH

“अपनी काबिलियत बस आप ही पहचान सकते हैं।”

Success Story Of IAS Harpreet Singh: पंजाब राज्य के लुधियाना के रहने वाले हरप्रीत सिंह (HARPREET SINGH) ने साल 2018 में अपने पांचवें अटेम्पट में यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा को न सिर्फ़ पास किया बल्कि 19वीं रैंक के साथ उसमें टॉप भी किया.

इसके पहले साल 2017 में भी हरप्रीत सिंह का चयन यूपीएससी में हुआ था लेकिन उनकी रैंक उनके मन के अनुसार नही आई. उस वर्ष यूपीएससी ने उन्हें 454 वीं रैंक प्राप्त हुई थी इस कारण से उन्हे इंडियन ट्रेड सर्विस एलॉट हुई थी.

हरप्रीत सिंह ने तो शुरू से ही IAS ऑफ़िसर बनने का सपना देखा था तो उन्हें इस पोस्ट से कैसे संतोष मिलता, उन्होंने इंडियन ट्रेड सर्विस ज्वॉइनिंग तो कर ली थी पर अपनी यूपीएससी की तैयारी को लगातार जारी रखा.

ईश्वर के साथ-साथ शायद यूपीएससी भी उनके धैर्य की परीक्षा ले रही थी शायद यही एक मात्र कारण था की वे इतनी तैयारी के बावजूद लगातार असफल हो रहे थे.

हरप्रीत सिंह भी अपनी जिद के पक्के थे ओर हर बार गिरने के बाद वे दुगुने जोश के साथ उठ खड़े होते थे और फिर से यूपीएससी की तैयारी करते ओर परीक्षा देते थे.

आखिर में उनके द्वारा की गई मेहनत 2018 में सफल हुई और वे अपने पांचवे अटेम्पट मे IAS ऑफ़िसर बन ही गए.

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IAS HARPREET SINGH ने ग्रेजुएशन के बाद शुरू की यूपीएससी की तैयारी

हरप्रीत सिंह का रुझान यूपीएससी की तरफ़ उनके ग्रेजुएशन के समय ही होने लग गया था ओरअपने ग्रेजुएशन के लास्ट ईयर में उन्होंने यह तय कर लिया कि उन्हें किसी भी स्थिति में सिविल सर्विस के क्षेत्र में ही अपना कैरियर बनाना है.

यूपीएससी की तैयारी का फैसला लेने के बाद हरप्रीत सिंह ने 2013 में ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद अपने दोस्त के साथ चंडीगढ़ की ओर रुख किया. चंडीगढ़ में उन्होंने यूपीएससी की तैयारी के लिए कोचिंग भी ज्वॉइन कर ली कि इस दौरान ही उन्हें आईबीएम कंपनी से सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर नौकरी करने के लिए ऑफर आ गया.

हरप्रीत ने उस समय अपनी कोचिंग छोड़कर नौकरी ज्वॉइन करने का फ़ैसला ले लिया ओर नौकरी करने लगे. उस समय उन्होंने अपना यूपीएससी का पहला अटेम्पट दिया पर सही से तैयारी नही होने के कारण उनका सेलेक्शन प्री परीक्षा पर आकर ही रुक गया. इस अटेम्पट में वे पहला स्टेज तो पार कर गए लेकिन इसके आगे नहीं पहुँच पाए.

नौकरी करने के साथ-साथ हरप्रीत सिंह दूसरे एंट्रेस एग्जाम भी दे रहे थे और अधिकतर में वे चयनित भी हो रहे थे. हरप्रीत सिंह ने नौकरी करते हुए ही यूपीएससी के दो और अटेम्पट दिए ओर दोनों प्रयासों में हरप्रीत इंटरव्यू राउंड तक पहुंच गए परंतु आख़िरी सिलेक्शन में उनका नाम नही आया परंतु इसके बावजूद उन्होंने कभी भी अपने कदम पीछे नहीं खींचे.

इसी दौरान हरप्रीत सिंह का सीएपीएफ एग्जाम में सेलेक्शन हो गया और उन्हें बीएसएफ में पोस्ट एलॉट हो गई. बीएसएफ़ में उन्होंने असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर ज्वॉइन कर लिया था किंतु इसके बावजूद भी उन्होंने उन्होंने अपनी यूपीएससी की तैयारी जारी रखी.

बीएसएफ़ की नौकरी करने के साथ ही हरप्रीत ने यूपीएससी का चौथा अटेम्पट दिया ओर इस बार यूपीएससी परीक्षा में उनका सिलेक्शन भी हो गया पर वे अभी भी अपनी रैंक से संतुष्ट नहीं थे.

यूपीएससी में सिलेक्शन होने पर उन्होंने बीएसएफ का असिस्टेंट कमांडेंट पद छोड़ते हुए आईटीएस सर्विस ज्वॉइन कर ली और उसी के सस्थ अपनी यूपीएससी की तैयारी भी करते रहे. हरप्रीत सिंह के लिए यूपीएससी की तैयारी के ये चार साल बेहद कठिन थे जब वे इंटरव्यू तक पहुंचकर भी बार-बार सिलेक्शन से रह जाते थे.

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IAS HARPREET SINGH की यूएसपीसी की सफलता का मूल मंत्र –

हरप्रीत सिंह यूपीएससी के प्रयास में बार-बार मिल रही असफलताओं से हताश हुए बिना अपने दोस्त द्वारा कही गई इन लाइनों को याद रखते थे कि “सच्ची मेहनत का फल ईश्वर एक दिन जरूर देते हैं”.

कुछ लोग क़िस्मत के धनी होते है जिनका चयन पहले साल में ही हो जाता है ऐसे लोगों को उनकी मेहनत का फल जल्दी मिल जाता है और दूसरी और भगवान किसी-किसी के धैर्य की ज्यादा परीक्षा लेता है. लेकिन अगर मनुष्य द्वारा किया जाने वाला प्रयास सच्चा है तो उसे सफलता ज़रूर मिलती है.

इस एक बात पर भरोसा करते हुए हरप्रीत सिंह बार-बार यूपीएससी के लिए अटेम्पट देते रहे और अंततः पांचवे प्रयास में उनका चयन हो हो गया. इस बार के प्रयास में हरप्रीत को अपना मन-पसंद आईएएस पद भी मिला.

अपनी यूपीएससी की जर्नी के बारे में बात करते हुए हरप्रीत सिंह कहते हैं कि मुझे सफलता प्राप्त करने में समय जरूर लगा पर मेरी सच्ची मेहनत का नतीजा अंततः मुझे मिल ही गया.

हरप्रीत सिंह को सफल होने में इतना समय लगने का एक बड़ा कारण शायद यह भी था कि वे तैयारी के साथ हमेशा किसी न किसी जॉब में रहे क्योंकि वे यूपीएससी के अनप्रडिक्टेबल नेचर को जानते थे ओर इस वजह से किसी भी प्रकार का रिस्क न लेते हुए सेफ चलना चाहते थे.

हरप्रीत सिंह यह बात भी कहते हैं कि यूपीएससी की तैयारी की जर्नी आपको अपनी लाइफ़ के बारे में इतना कुछ सिखा देती हैं और आपके ज्ञान का लेवल इतना अधिक बढ़ा देती है कि अगर यूपीएससी में नही तो कहीं न कहीं तो कैंडिडेट का चयन हो ही जाता है. आप चाहें तो यूपीएससी के साथ-साथ दूसरी अन्य परीक्षाएं भी दे सकते हैं.

हरप्रीत सिंह आने वाले समय के दूसरे यूपीएससी कैंडिडेट्स को सलाह देते हैं कि इस जर्नी के दौरान आप कभी भी अपना सेल्फ कांफिडेंस लूज़ न करें और लगातार तैयारी करने में लगे रहें.

कई बार कुछ परीक्षार्थियों के सामने फैमिली प्रेशर होता है कि यूपीएससी तुम्हारे बस की बात नही है इसलिए कोई और नौकरी कर लो, कई बार स्वयं को भी लगता है कि दूसरे हमसे छोटे-छोटे लड़के अपनी लाइफ़ में सेटल हो गए पर हम अब तक यहीं हैं, परंतु आप कभी भी इन विचारों से घबराएं नहीं.

ऐसे ख़याल हर यूपीएससी ऐस्पिरंट्स के मन में कभी न कभी ज़रूर आते हैं परंतु जीतता वही व्यक्ति है जो इन सब परिस्थ्तियो से घबराता नहीं है. अंत में हरप्रीत सिंह दूसरे कैंडिडेट्स को बस यही सलाह देते हैं कि बिना रुके निरंतर प्रयास करते रहें अगर आप ईमानदारी से मेहनत कर रहे हैं तो आज नहीं तो कल यूपीएससी में चयनित जरूर होंगे.

ओर एक बात ओर आप इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों को शेयर करे ताकि लोग इससे प्रेरणा ले सके.

तो दोस्तों फिर मिलते है एक और ऐसे ही किसी प्रेणादायक शख्शियत की कहानी के साथ…

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