HomeUPSCIAS DESHAL DAN : टी-स्टॉल लगाने वाले का बेटा बिना कोचिंग के...

IAS DESHAL DAN : टी-स्टॉल लगाने वाले का बेटा बिना कोचिंग के पहले प्रयास में कैसे बना IAS ऑफिसर

खुद को इतना कमजोर मत होने दो,
की तुम्हे किसी के एहसान की जरुरत हो.

Success Story Of IAS Deshal Dan : हमारे देश के हर घर में कम से कम एक व्यक्ति ऐसा ज़रूर होता है जो अपने जीवन में IAS अधिकारी बनने की इच्छा रखता है. IAS ऑफ़िसर बनने की इच्छा रखना तो आसान है लेकिन इसके लिए इतनी कठिन परीक्षा की तैयारी करने के लिए अभ्यर्थी को बहुत प्रयास और समर्पण की आवश्यकता होती है.

हर साल लाखों बच्चे आईएएस बनने के लिए तैयारी करते हैं लेकिन उनमे से कुछ ही इस पद के लिए चुने जाते है. यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा के लिए सभी पृष्ठभूमि के लोग, विशेष रूप से गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोग इस परीक्षा के लिए अधिक मात्रा में आवेदन करते हैं क्योंकि इस परीक्षा के लिए किसी प्रकार के भारी शुल्क या ऐसी किसी विशेष डिग्री की मांग नहीं करता है.

राजस्थान के जैसलमेर के एक छोटे से गांव सुमालियाई के देशल दान (IAS DESHAL DAN) ने भी एक IAS ऑफ़िसर बनने का सपना देखा था. अगर हम उनके जीवन पर नज़र डालें तो सामने आता है कि इनका और संघर्ष का एक दूसरे के साथ चोली-दामन का साथ रहा.

देशल दान के घर के वातावरण से लेकर, आर्थिक हालातों तक कुछ भी उनके पक्ष में नहीं था कि उसके दम पर व्यक्ति इतनी बड़ी सफलता हासिल कर सके. परंतु हमारे यहा पर एक कहावत है न कि

“वो नाविक ही क्या जो धार के विपरीत न बह सके.”

देशल दान ने भी कुछ ऐसा ही किया और बचपन से लेकर आगे की ज़िंदगी में ऐसे निर्णय लिये जो उनके घर में अन्य लोगों की समझ से भी परे थे. आज की इस स्टोरी में जानते हैं एक टी-स्टॉल लगाने वाले का बेटा कैसे बना IAS ऑफिसर.

यह भी पढ़े : IAS RISHITA GUPTA : कम नंबरों के कारण मनचाहे कॉलेज में नही मिला एडमिशन, लेकिन पहली ही बार में बनी यूपीएससी टॉपर

IAS DESHAL DAN

आर्थिक तंगी के कारण सिर्फ़ 2 भाइयों ने की पढ़ाई

देशल के कुल सात भाई-बहन है. इन सातों भाई-बहनो में सिर्फ़ देशल और उनके एक बड़े भाई ने शिक्षा की और अपना रुख किया बाक़ी के लोगों ने इस ओर अपना कुछ भी रुझान नही दिखाया ओर उस समय उनके घर की आर्थिक स्थितियां भी इतनी अच्छी थी कि अन्य लोगों को पढ़ाई के लिये प्रेरित किया जा सकता.

देशल दान के घर में शुरुआत से ही पैसों की बहुत कमी थी. उनके पिताजी कुशल दान चरण के पास थोड़े से खेत थे किंतु उन खेतों में अच्छी फसल नही हो पाती थी.  बस किसी प्रकार से थोड़ी बहुत खेती से कुछ काम चल जाता था. इसी कारण देशल के पिता ने खेती को चोदते हुए टी-स्टॉल लगाने की फैसला किया.

देशल दान के जन्म के पहले से ही उनके पिता टी-स्टॉल लगाने लगे थे. देशल के बाकी भाई भी या तो अपने पिताजी के काम में हाथ बंटाते थे या फिर दूसरे काम करते थे. ग़रीबी की मार के चलते उन्होंने शिक्षा की ओर खास ध्यान नहीं दिया.

यह भी पढ़े : IAS SHIKHA SURENDRAN : लिमिटेड रिसोर्स और रिवीजन करते हुए बनी UPSC टॉपर

IAS DESHAL DAN

IAS DESHAL DAN के बड़े भाई बने प्रेरणास्त्रोत

देशल के घर में शुरुआत से ही पढ़ाई के लिए उपर्युक्त माहौल नहीं था, न ही काम धंधे से मिलने वले रुपए पर्याप्त होते थे ऐसी स्थिति में उन्होंने अपने बचपन में ही मन बना लिया था कि वे ये सब काम कभी भी नहीं करेंगे और चाहे जो भी परिस्थिति क्यों न आ जाए वे अपनी पढ़ाई जारी रखेंगे. इसमें देशल दान के बड़े भाई का भी अहम रोल रहा.

देशल दान के बड़े भाई सात भाई-बहनों में दूसरे थे, जिसने पढ़ाई की. देशल के बड़े भाई उस समय इंडियन नेवी में थे. वे जब भी छुट्टी लेकर घर आया करते थे तो वहां की बहुत सी बातें देशल को बताया करते थे ओर देशल से यह कहते थे कि तुम या तो बड़े होकर इंडियन फोर्स में नौकरी करना या फिर इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेस में. अपने भाई द्वारा ऐसा कहने ओर प्रोत्साहित करने से ही देशल के मन में यूपीएससी का एग्जाम देने का सपना जगा.

हालांकि देशल दान की ज़िंदगी में एक घटित हुई एक घटना से वे बुरी तरह से टूट गये जब उनके बड़े भाई की ऑन ड्यूटी डेथ हो गई. जिस समय उनके भाई की डेथ हुई इस समय उनकी पोस्टिंग आईएनएस सिंधुरक्षक सबमरीन में थी. देशल दान के लिये यह बहुत बड़ा इमोशनल लॉस था परंतु अपने भाई की कही गई बातें वे कभी नहीं भूले.

यह भी पढ़े : IAS IRA SINGHAL : स्पेशली एबल्ड होने के बावजूद दृढ़ निश्चय से यूपीएससी में टॉप कर रच दिया इतिहास

IAS DESHAL DAN

पहले प्रयास में पास की यूपीएससी

जब देशल दान के भाई की मौत हुई उस समय वे क्लास 10 में थे. भाई की मौत के बाद से ही वे अपनी पढ़ाई को लेकर बहुत गंभीर हो गए और दसवीं कक्षा के बाद कोटा चले गए.

कोटा से उन्होंने अपनी बारहवीं की. 12वीं कक्षा के बाद देशल ने जेईई इंट्रेंस दिया और उसमें सेलेक्ट भी हो गए. उन्होंने अपना ग्रेजुएशन आईआईटी जबलपुर से पूरा किया. जेईई जैसा बड़ा एग्जाम क्रैक करने के बाद भी देशल के मन को शांति नही मिली.

उनके मन में हमेशा अपने भाई की कही एडमिस्ट्रेटिव जॉब वाली बात ही गूंजती रहती थी. देशल दान ने इतनी गरीबी और अभाव देखते थे कि वे अपने मन से वास्तव में किसी ऐसी ही सेवा का हिस्सा बनना चाहते थे, जिसके द्वारा वे समाज के निचले तबके की मदद कर सके.

देशल ने अपना निर्णय ले लिया ओर यूपीएससी की तैयारी के लिये दिल्ली चले गए परंतु उन्हें यह बात भी पता थी कि उनके पास यूपीएससी की तैयारी के लिए न तो पैसे हैं न ही गँवाने के लिए अधिक समय. परंतु इसके साथ देशल के पास एक चीज़ थी तो वो थी उनका जज़्बा.

दिल्ली पहचने के बाद वे दिन-रात मेहनत करते रहे और तब तक नहीं रुके जब तक उन्हें उनकी मंजिल नहीं मिल गई. देशल दान ने अपनी मेहनत के दम पर बिना कोचिंग के पहली ही बार में 82वीं रैंक के साथ यूपीएससी जैसी परीक्षा पास कर ली और अपने पिता के साथ अपने परिवार का सिर भी गर्व से ऊंचा कर दिया.

यह भी पढ़े : IAS KAJAL JWALA : नौ घंटे की नौकरी के साथ यूपीएससी एग्जाम पास कर लोगों के लिए बनी मिसाल

IAS DESHAL DAN

पिता को आईएएस का मतलब नही पता

देशल को जब आप करीब से जानने की कोशिश करोगे तो वे सच में आपको प्रेरित करते हैं. देशल दान के घर में उनके माता-पिता और बाकी पांच भाई-बहन, में से किसी ने भी पढ़ाई नही की है.

एक सच यह भी है की जब देशल दान का चयन IAS पद के लिए हुआ तो उनके पिता को तो यह भी समझ नहीं आया कि आईएएस क्या होता है जिसमें उनका बेटा सेलेक्ट हुआ है

उनके पिता को उस समय यह जरूर लगा की कुछ तो खास होगा तभी तो सारे लोग उन्हें इतनी ज़्यादा इज्जत दे रहे हैं. जब देशल यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे, तब भी उनके पिता को समझ नहीं आता था कि वे क्या कर रहे हैं ओर किस चीज़ की तैयारी कर रहे है.

हालांकी कुछ न जानते हुए भी उनके पिता ने हमेशा देशल का साथ दिया और कभी भी उनकी रास्ते की बाधा नहीं बने. यूपीएससी के लिए प्रयास, मेहनत और दृढ़ संकल्प स्वयं देशल दान का था, क्योंकि वे यह बात अच्छे से जानते थे कि जीवन में अगर कुछ कर नहीं पाये तो ख़ाली हाथ यूँ ही वापस गांव जाना होगा, जो की उन्हें कतई मंजूर नहीं था.

देशल अपने पक्के इरादे के साथ जुट गये दिन रात कड़ी मेहनत करने में और मात्र 24 साल की उम्र में ही उन्होंने यूपीएससी 2017 की परीक्षा में टॉपर्स की सूची में अपनी जगह बना ली. देशल दान की इस अभूतपूर्व सफलता से यह पता चलता है कि जिसमें गुण होते हैं, वो कैसे भी माहौल में रहे परंतु इसके बावजूद भी अपनी खूबियों को कभी नहीं खोता.

देशल दान ने अपनी ज़िंदगी की शुरुआत से लेकर मंजिल पाने तक अपनी जिंदगी खुद चुनते हुए जिस कदम पर जो कीमत चुकानी पड़ी वो चुकाई किंतु इसके बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी.

ओर एक बात ओर आप इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों को शेयर करे ताकि लोग इससे प्रेरणा ले सके. 

तो दोस्तों फिर मिलते है एक और ऐसे ही किसी प्रेणादायक शख्शियत की कहानी के साथ…

Explore more articles