IES DHYAN PAL : छोटे से गाँव से निकलकर अंग्रेजी भाषा के डर को हराकर बना आईइएस अधिकारी

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UPSC DHYAN PAL SUCCESS STORY : आज हम चर्चा करने जा रहे है, भाषाई ज्ञान एवं खौफ को पीछे धकेल कर आगे बढ़ने वाले प्रतिभावान शख्सियत ध्यानपाल (IES DHYAN PAL) के बारे में.

DHYAN PAL उत्तरप्रदेश के हमीरपुर जिले के छोटे से गाँव ‘कछुआ कलां’ के रहने वाले है. अपने गाँव के नाम के अनुसार ही इन्होने अपने जीवन में अंग्रेजी भाषा की कमजोरी एवं डर को कछुआ चाल की तरह अपने निरंतर प्रयासों से पार पाकर आज देश की सबसे बड़ी पब्लिक सेक्टर यूनिट (PSU) इंडियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड (IOCL) में अधिकारी के पद पर तैनात है. 


ध्यानपाल का गाँव उत्तर-प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में आता है, जहा के वीरो एवं वीरांगनाओ की कहानिया इतिहास के स्वर्णिम पन्नो पर दर्ज है, इन्ही में से एक थी ‘रानी लक्ष्मी बाई’ उन्ही की परम्परा का अनुसरण करते हुए जैसे रानी लक्ष्मी-बाई ने मातृभूमि के लिए अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ हथियार उठाये थे.

DHYAN PAL का अंग्रेजी का खौफ

कुछ इसी प्रकार ध्यानपाल के लिए भी अंग्रेज नहीं लेकिन अंग्रेजी भाषा बचपन से ही बड़ी कठिन एवं तकलीफदेह रही थी, जिसका की उन्होंने बड़ी साहसिकता के साथ मुकाबला कर पछाड़ डाला. 


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ध्यानपाल की कक्षा 8वीं तक की शिक्षा गाँव की ही सरकारी स्कूल में हुई, जहा पर सालाना फीस मात्र 350 रूपये थी, लेकिन आर्थिक तंगी का आलम ऐसा था की यह राशि भी उनके परिवार के लिए बहुत बड़ी हुआ करती थी. आगे की शिक्षा हेतु गाँव में स्कूल नहीं थी, अत: अपने दादाजी के साथ गाँव के पास वाले कस्बे ‘राठ’ रहने लगे एवं 9वीं कक्षा में दाखिल हुए.


परन्तु जो वो पहले सालभर में फीस 350 रूपये दिया करते थे, वह यहाँ पर मासिक फीस हुआ करती थी. उनके पिता आना-जाना अपनी साइकिल पर किया करते थे, जिससे वे किराये के पैसो को बचाकर घर का सामान एवं बच्चो की शिक्षा पर खर्च कर सके. सन 2009 में अपनी 12वीं कक्षा की परीक्षा ‘राठ’ के स्कूल से ही विज्ञान संकाय में उत्तीर्ण की. 

यह वह दौर था जब विज्ञान संकाय से 12वीं पास विद्यार्थी इंजीनियरिंग के बारे में सोचते थे, इसी सोच के साथ अपने पिताजी को लेकर वे ‘कानपूर’ गए बी.टेक (B.Tech) की पढाई के लिए, लेकिन आर्थिक हालत इतने तंग थे की किसी भी कोचिंग संस्थान की फीस भर पाना मुश्किल था, ऐसे में उन्होंने विषय अनुसार अलग-अलग अध्यापको से पढ़ने का निर्णय लिया, जिससे कम से कम खर्च में अपनी तैयारी कर सके. 


लेकिन उनके इस निर्णय से आर्थिक समस्या तो हल हो गई, परन्तु एक नई समस्या अंग्रेजी भाषा की सामने आई, चूँकि उनकी सारी शिक्षा हिंदी माध्यम में हुई थी साथ ही शुरुआत में अंग्रेजी भाषा में उनका हाथ तंग था.

उसी वर्ष उन्होंने UPTU (उत्तर प्रदेश टेक्निकल यूनिवर्सिटी), AIEEE (ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम), IIT (इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी) एवं ‘जामिया मिलिया एंट्रेंस’ जैसे चार बड़े एग्जाम दिए मगर सभी परीक्षाओ में असफलता हाथ लगी. इन असफलताओ का एकमात्र कारण था अंग्रेजी भाषा की कमजोरी, जिसका की उनके पुरे गाँव एवं मित्रो ने मजाक बनाया. लेकिन कहते है ना की


‘आप किसी को पूरी शिद्धत से पाना चाहो तो पूरी कायनात उसे पूरा करने में आपकी मदद करती है’

कुछ ऐसा ही हुआ ध्यानपाल के साथ जब उन्हें पता चला की ‘राठ’ गाँव के ही एक साथी ने इन सभी परीक्षाओ में अच्छी रैंक प्राप्त की है, फिर क्या था ध्यानपाल पहुंच गए उनसे मिलने वहा उन्हें पता लगा की हिंदी माध्यम में कोटा, राजस्थान में इन सभी की कोचिंग दी जाती है, उनके तो जैसे सपनो को उड़ान मिल गई.


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DHYAN PAL का इंजीनियरिंग से UPSC का सफर


सन 2011 में कोटा में कोचिंग करते हुए उन्होंने UPTU, AIEEE, MPTU (मध्य प्रदेश टेक्निकल यूनिवर्सिटी) एवं VIT (वेल्लोर इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी) सभी परीक्षाओ में सफलता प्राप्त की और उनका दाखिला IET (इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंजिनीरिंग एंड टेक्नोलॉजी) लखनऊ में ‘सिविल इंजीनियरिंग’ ब्रांच में हो गया.

उन्हें लगा अब उनकी मंजिल नजदीक ही है, अब वे अपनी बी.टेक (Bechlor of Technology) पूरी कर अपने परिवार के हालात सुधार देंगे. लेकिन जब उन्हें अपने सीनियर से पता चला की बी.टेक के बाद भी उन्हें ही नौकरी मिलती है, जिनकी अंग्रेजी अच्छी होती है. 


उन्होंने देखा की सीनियर बी.टेक के साथ-साथ इंजीनियरिंग सर्विसेज एवं GET (ग्रेजुएट इंजीनियरिंग टेस्ट) की तैयारी करते थे. उन्हें भी पता लग गया की केवल बी.टेक के भरोसे कुछ नहीं होने वाला, लेकिन उन्हें पता था की गांव/देहात से आये लोगो के पास एक ही रास्ता होता है, किसी भी परिस्थिति में ‘खुद को साबित करना’.

लेकिन उनकी प्राथमिक समस्या थी की किस प्रकार से अंग्रेजी भाषा से पार पाया जाए, उसका रास्ता उन्होंने ‘ऑक्सफ़ोर्ड अंग्रेजी हिंदी शब्दकोष’ का चयन कर निकला, साथ ही अपनी अंग्रेजी सुधरने हेतु ‘इंग्लिश स्पीकिंग’ कोचिंग ज्वाइन किया.


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साथ ही सर के मार्गदर्शन द्वारा अंग्रेजी बोलने वाले लोगो के साथ उठना-बैठना शुरू किया, शुरुआत में गलत अंग्रेजी बोलने के कारण साथ में पढ़ने वालो ने ध्यानपाल का काफी मजाक उड़ाया, परन्तु उनकी मेहनत उन-पर जूनून की तरह हावी थी, की दिन को दिन और रात को रात ना समझते हुए वह अपने कार्य पर डटे रहे. बस उनका एक ही सपना था की किस प्रकार अपने पारिवारिक हालातो को सुधारू.


ध्यानपाल ने सन 2016 में इंजीनियरिंग सर्विसेज एवं गेट की परीक्षा दी, जिसमे इन्हे गेट में आल इंडिया रैंक (AIR-145) मिली, जिसकी वजह से उन्हें देश की सबसे बड़ी चार PSU (Public Sector Undertaking) जैसे IOCL (Indial Oil Corporation Limited), ONGC (Oil & Natural Gas Corporation), RITES (Rail India Technical & Economic Services) एवं NBCC (National Building Construction Corporation) से जॉब ऑफर हुए, जिसमे उन्होंने IOCL को चुना. 

उसी वर्ष 2016 में इन्होने अपनी इंजीनियरिंग सर्विसेज की परीक्षा पास की, परन्तु फाइनल मेरिट लिस्ट में स्थान नहीं बना पाए, लेकिन इनके सपनो में अभी भी उतनी ताकत बची थी की एक बार पुन: प्रयास कर सन् 2017 में UPSC-इंजीनियरिंग सर्विसेज में अपनी 179 की रैंक प्राप्त की. 


अपने इंटरव्यू के दौरान इन्होने सफल होने का मन्त्र बताया,

“बस कर्म पथ पर चलते रहो, गिरते हो तो गिर जाओ’ मगर फिर से उठ कर चलते रहो’ यूँ तो भीड़ बहुत है रास्ते में ‘मगर भीड़ से आगे दिखना है तो चलते रहो’ बस कर्म पथ पर चलते रहो”

क्यूंकि सपनो की कोई अपनी भाषा नहीं होती है.

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