IAS ANAND SHARMA : पहले बने MBBS डॉक्टर, ओर उसके बाद UPSC टॉपर

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IAS ANAND SHARMA

“दुनिया नीचे खींचना सबको चाहती है, चढ़ने वाले फिर भी चढ़ जाते है”

Success Story Of IAS Anand Sharma : साल 2018 की यूपीएससी सीएसई (UPSC-CSE) परीक्षा में टोप करने वालों की लिस्ट में अपना नाम शामिल करवाने वाले आनंद शर्मा (IAS ANAND SHARMA), आईएएस बनने से पहले एमबीबीएस (MBBS) डॉक्टर  भी रह चुके थे.

आनंद शर्मा ने साल 2015 में मुरादाबाद मेडिकल कॉलेज, दिल्ली से अपना एमबीबीएस (MBBS) कम्प्लीट किया और उसके बाद से वे यूपीएससी सीएसई की परीक्षा दे रहे थे. आनंद शर्मा ने अपने चौथे प्रयास में 62वीं रैंक प्राप्त करते हुए इस परीक्षा को पास किया.

आनंद शर्मा के मुख्यतः निबंध विषय में बहुत अच्छे अंक आए, साल 2016 में आनंद के निबंध में 123 अंक थे, 2017 में 135 और तीसरी बार 2018 में जब वे टॉपर बने उस साल उन्होंने निबंध में 141 अंक प्राप्त किए. एक तरह से देखा जाए तो निबंध में उनके अंकों का ग्राफ हर साल बढ़ता ही गया.

आनंद शर्मा ने अपनी तैयारी ओर परीक्षा के अनुभव के आधार पर निबंध लेखन और सेलेक्शन के संबंध में कुछ जरुरी टिप्स, अपने इंटरव्यू के दौरान शेयर किए हैं. आइए जानते हैं कि कैसे यूपीएससी जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त किए जाए…

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निबंध के टॉपिक का सेलेक्शन सोच-समझकर करे (IAS ANAND SHARMA)

आनंद शर्मा ने इंटरव्यू में बात करते हुए कहा कि परीक्षा के दौरान जब परीक्षा हॉल में आपके हाथ में पेपर आए तो निबंध को लिखने में बिल्कुल भी जल्दबाजी न करें. सबसे पहले सभी विषयों को ध्यान से पढ़े और यह देखें कि आप किसमें अपना सबसे अच्छा इनपुट दे सकते हैं.

आनंद अपने बारे में बताते हैं कि वे परीक्षा के दौरान सबसे पहले उन दो टॉपिक्स को हटाते थे जिनके फॉर या अगेंस्ट किसी में भी उनके पास प्वॉइंट्स नहीं होते थे. उसके बाद में बचे हुए दो विषयों में से वे यह तय करते थे की वे किस निबंध में ज्यादा बेहतर से लिख सकते हैं एक बार यह तय करने के बाद वे उस निबंध को फाइनल करते हुए लिखना प्रारम्भ करते थे.

निबंध लिखने के दौरान सबसे पहले वे रफ स्थान को चुनकर उसमें निबंध से के फॉर और अगेंस्ट में उस समय उनके दिमाग में आने वाले मुख्य बिंदु लिख लेते थे. यह सारा काम रफ होता था परंतु इसके आधार पर ही वे आगे उन बिंदुओं को एक्सप्लेन करते थे.

उनके ऐसा करने के पीछे कारण यह था कि कई बार जब आप फ्लो में किसी चीज़ के बारे में लिखते चले जाते हैं तो उस समय आप कुछ प्वॉइंट्स लिखना भूल जाते हैं, इसलिए जिस समय आपके दिमाग में जो आए, उसे कहीं एक लाइन में लिख लें ओर उसे बाद में विस्तार दें.

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निबंध के तीन भाग – इंट्रोडक्शन, बॉडी, कॉन्क्लूजन 

आनंद शर्मा के अनुसार निबंध के मुख्यतः तीन भाग होते हैं, सबसे पहला इंट्रोडक्शन, उसके बाद दूसरे नम्बर पर बॉडी और सबसे अंत में उसका कॉन्क्लूजन. अधिकतर टॉप करने वाले कैंडिडेट्स इसी पैटर्न को ध्यान में रखते हुए निबंध लिखते हैं. आनंद कहते हैं कि वे निबंध लिखते समय यही कोशिश करते थे कि इंट्रोडक्शन शुरू करते समय किसी कोट की मदद से निबंध आरंभ करें.

आनंद शर्मा ने कुछ मुख्य और प्रसिद्ध विषयों पर पहले से ही कोट्स तैयार करके रखे हुए थे जिनका इस्तेमाल करते हुए ही वे किसी निबंध की शुरुआत करते थे. हालांकि उनका यह भी कहना है कि अगर आपको किसी खास विषय के बारे में कोटस नहीं पता तो भी कोई समस्या नहीं है, आप किसी अच्छी लाइन से अपने निबंध की शुरुआत कर सकते हैं.

आप निबंध लिखते समय यह कोशिश करें कि उसकी शुरुआत सदैव प्रभावशाली हो. इसके बाद आनंद शर्मा अगले स्टेप पर आते हुए एक पैरा में पूरे ऐस्से की समरी लिखते थे. यह पैरा यह बताता था कि वे पूरे निबंध में क्या-क्या कहने वाले हैं.

इसके बाद शुरू होता था मुख्य निबंध यानी बॉडी. इसमें आप अपने बिंदुओं के अनुसार पक्ष ओर विपक्ष दोनो एंगल्स के बारे में लिखिए. निबंध के दौरान पक्ष ओर विपक्ष के बारे में बात करने के दौरान बेहतर यह होगा की आप अपनी बात को साबित करने केलिए उदाहरण देते चले.

इस प्रकार से निबंध लिखने पर आपकी बात को बल मिलता है. अगर आपके द्वारा दिया गया उदाहरण रियल लाइफ पर आधारित हों तो और भी अच्छा होगा. इसके साथ ही आपको निबंध से समबंधित विषय को लेकर फैक्ट्स, फिगर्स, एग्जाम्पल्स, कोट्स, डेटा, आदि के बारे में भी लिखते हुए अपने निबंध को वजनदार बनाते हुए लिखना है.

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निबंध में आपकी अप्रोच बेलेंस्ड होनी चाहिए

निबंध लिखते समय सबसे ख़ास बात यह है की आप सदैव बैलेंस्ड अपरोच लेकर चलें. हालांकि यह आपके द्वारा चुने गए विषय पर भी निर्भर करता है कि आप क्या लिखते हैं. आपके द्वारा लिखे गए निबंध में ज्यादा प्वॉइंट्स पक्ष में हैं या उसके विरोध में लेकिन जिस भी तरफ आपके निबंध का झुकाव हो उसके विपरीत पहलू पर भी कुछ बिंदु अवश्य लिखें.

निबंध लिखते समय एक बात का ख़ास तौर पर ख्याल रखें कि आप यह परीक्षा एक अधिकारी बनने के लिए दे रहे हैं, इसलिए केवल समस्या पर ही बात न करें बल्कि आपके अनुसार समस्या से जुड़े हुए संभावित समाधान के बारे में भी जरूर मेंशन करें. निबंध का अंत हमेशा पॉजिटिव नोट पर करें और समस्या का संभावित हल बताते हुए अपनी बात खत्म करें.

अंत में आनंद शर्मा निबंध के बारे में यही सलाह देते हैं कि बिना निबंध की प्रैक्टिस किए यह पेपर देने के लिए न पहुंच जाएं जैसा कि उन्होंने सबसे पहली बार में किया था. निबंध की परीक्षा से पहले कम से कम दस या पन्द्रह निबंध जरूर लिख लें. दूसरी मुख्य बात की विषय चुनने को लेकर किसी भी प्रकार की जल्दबाजी न दिखाएं ओर पहले रफ प्लान ज़रूर बना लें उसके बाद ही निबंध लिखना शुरू करें.

तीसरी अहम बात यह है कि अगर किसी विषय को अगर आप घर से तैयार करके जाएं तो उससे संबंधित विषय परीक्षा में आने पर उसे वैसे ही लिखकर न आ जाएं. बल्कि सबसे पहले कुछ समय देकर यह ज़रूर समझ लें कि इस निबंध में आपसे क्या पूछा गया हैओर उसके अनुसार शांति के साथ अपना उत्तर लिखे.

आनंद शर्मा ने दूसरी बार में यही गलती की थी. उन्होंने क्या पूछा गया है वह लिखने के बजाय अपने द्वारा तैयार किया हुआ सब-कुछ लिख दिया था क्योंकि निबंध का टॉपिक उनके द्वारा तैयार टॉपिक से मिलता-जुलता आया था. आनंद शर्मा के अनुसार अगर आप इन छोटी-छोटी लेकिन जरूरी बातों का ध्यान रखेंगे तो यूपीएससी परीक्षा में आपके निबंध में अच्छे अंक जरूर आएंगे. इससे आपकी फ़ाइनल रैंक इम्प्रूव होने में भी बहुत मदद मिलती है.

ओर एक बात ओर आप इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों को शेयर करे ताकि लोग इससे प्रेरणा ले सके.

तो दोस्तों फिर मिलते है एक और ऐसे ही किसी प्रेणादायक शख्शियत की कहानी के साथ…

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