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IAS ASHUTOSH KULKARNI : मैकेनिकल इंजीनियर से कैसे तय किया IAS OFFICER तक का सफ़र

“आपकी जीत आपकी मेहनत पर निर्भर करती है.”

Success Story Of IAS Ashutosh Kulkarni : आज की यूपीएससी (UPSC) सक्सेस स्टोरी में हम आपको पुणे के रहने वाले हैं आशुतोष कुलकर्णी (IAS ASHUTOSH KULKARNI) के बारे में जो कि पेशे से एक मैकेनिकल इंजीनियर हैं.

आशुतोष कुलकर्णी की यूपीएससी जर्नी बहुत ही ज़्यादा प्रेरणादायक है, क्योंकि वे यूपीएससी परीक्षा के अपने प्रयासों के दौरान कई बार सफलता के बहुत करीब तक पहुंचे लेकिन अंतिम में सेलेक्ट नहीं हो पाए किंतु इसके बावजूद भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी.

आप कल्पना करो की कोई व्यक्ति बार-बार इंटरव्यू राउंड तक पहुंचकर भी अंतिम रूप से चयनित नही होता है तो वह उसके लिए कितना ज़्यादा पीड़ादायक होता होगा. लेकिन आशुतोष कुलकर्णी भी अपनी धुन के पक्के थे. ओर वह ये इरादा कर चुके थे कि चाहे कुछ भी हो जाए किंतु वे सफल होने के बाद ही विश्राम करेंगे.

आखिरकार आशुतोष कुलकर्णी की ज़िद के सामने यूपीएससी को भी झुकना पड़ा ओर उनकी पांच साल की मेहनत और धैर्य उनकी सफलता में काम आया और साल 2019 में अपने चौथे प्रयास में उन्होंने टॉपर्स की सूची में जगह बनाते हुए यूपीएससी की परीक्षा पास की. आज की सक्सेस स्टोरी में जानते हैं उनके यूपीएससी की सफलता के सफर के बारे में…

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आशुतोष कुलकर्णी अपनी ग़लतियों के बारे में नही जानते

आशुतोष कुलकर्णी दूसरे यूपीएससी कैंडिडेट्स से अलग सोच रखते है ओर उन्हें यह बात समझ ही नही आती है की उनके पिछले अटेम्प्ट्स में उन्होंने क्या गलतियां थी. उन्हें तो लगता है कि वे शुरू से ही एक जैसी स्ट्रेटजी और तैयारी करते हुए आ रहे हैं बस वे हर बार यह कोशिश करते रहे कि अपनी पिछली बार की कोशिश से अगली बार और ज़्यादा इम्प्रूव करे.

आशुतोष कुलकर्णी अपने द्वारा दिए गए एक इंटरव्यू के दौरान कहते हैं कि, मैं नहीं जानता कि मैंने अपने पिछले प्रयासों में क्या गलती थी. में अपने पहले प्रयास से ही अपनी तैयारी और स्ट्रेटजी को लेकर साफ था. किंतु इतनी मेहनत के बाद भी जब बार-बार मेरा सेलेक्शन नहीं हुआ तो मेने सिर्फ़ अपने आप को और अधिक सुधारने पर काम किया, इससे ज्यादा मेने कुछ अलग करने का प्रयास नही किया.

आशुतोष कुलकर्णी के द्वारा दिए गए कुल चार प्रयासों में से तीन में में उन्होंने तीनों स्टेज पास की लेकिन इसके बावजूद दो बार यूपीएससी की फाइनल लिस्ट में उनका नाम नहीं आया. यानी उन्होंने तीन बार यूपीएससी प्री और तीन बार यूपीएससी मेन्स की परीक्षा पास की और तीन बार इंटरव्यू भी दिया. लेकिन उनका सिलेक्शन उनके चौथे प्रयास में हुआ.

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IAS ASHUTOSH KULKARNI के अनुसार क्या हो यूपीएससी की स्ट्रेटजी –

आशुतोष कुलकर्णी यूपीएससी की स्ट्रेटेजी के बारे में कहते हैं कि वैसे तो हर स्टूडेंट की स्ट्रेटजी दूसरे से अलग होती है पर अगर उन्हें अपनी राय देनी हो तो वे तैयारी कर रहे स्टूडेंट से कहेंगे कि प्री के पहले मेन्स की तैयारी करें. अगर आपकी परीक्षा होने में दस या बारह महीने रह गए हैं तो पहले सात या आठ महीने आप ऑप्शनल को दें.

अगर आपके द्वारा चुना गया ऑप्शनल ज़्यादा लंबा है तो उस स्थिति में इससे भी ज्यादा समय उसे दे. इसी के साथ-साथ आप अपना जीएस भी तैयार करते चलें. आशुतोष कुलकर्णी का मानना है कि पहले मेन्स की तैयारी करें ओर उसके बाद में प्री की. क्योंकि यूपीएससी प्री परीक्षा होने के बाद उतना समय नहीं बचता कि आपके द्वारा मेन्स के लिए तैयारी की जा सके.

प्री परीक्षा के बाद का समय सिर्फ़ रिवीजन, आंसर राइटिंग प्रैक्टिस और मॉक टेस्ट देने का होता है. जब यूपीएससी प्री परीक्षा के लिए तीन महीने रह जाएं तो मेन्स की तैयारी को छोड़कर पूरा फोकस प्री पर करें और सिर्फ़ उसी की तैयारी करें. आशुतोष के अनुसार से यह तैयारी की स्ट्रेटजी सभी स्टूडेंट को अपनानी चाहिए.

ऑप्शनल सब्जेक्ट में पीजी स्तर की नॉलेज आवश्यक

आशुतोष कुलकर्णी अपने इंटरव्यू के दौरान बताते हैं कि जनरल स्टडीज को जनरल इसलिए कहा जाता हैं क्योंकि वह ग्रेजुएशन लेवल की होती है ओर उसमें आपको बहुत गहराई से नॉलेज की जरूरत नहीं होती. लेकिन ऑप्शनल सब्जेक्ट में यूपीएससी द्वारा कैंडिडेट से यह उम्मीद की जाती है कि उसे कम से कम उस सब्जेक्ट के बारे में पीज़ी स्तर की जानकारी हो. इसीलिए वे बार-बार ऑप्शनल विषय की तैयारी पर अधिक जोर देते हैं. क्योंकि यह विषय आपकी रैंक बनाने में भी बहुत मदद करता है.

आशुतोष कुलकर्णी दूसरा सबसे अहम बिंदु मानते हैं नोटस बनाने को. वे कहते हैं कि बिना नोट्स बनाए यूपीएससी परीक्षा की तैयारी हो ही नहीं सकती. आपने यूपीएससी की तैयारी के लिए चाहे कितने भी कम सोर्स रखें हों परंतु उसके बावजूद भी पूरी किताब में से परीक्षा के अंतिम समय में रिवीजन संभव ही नहीं है. इसलिए शुरुआत से ही तैयारी के साथ-साथ क्रिस्प नोट्स बनाते चलें जो की कम समय में रिवाइज हो जाएं और जिन्हें पढ़कर आपको पूरा आंसर आसानी से याद आ जाए.

आशुतोष कुलकर्णी इसके लिए टेक्नॉलजी का इस्तेमाल करते हुए इलेक्ट्रॉनिक नोट्स बनाने की सलाह देते हैं उनके ऐसा कहने के पीछे का कारण यह है की इलेक्ट्रॉनिक नोट्स को कैरी करना, बदलना, अपडेट करना आसान होता है और सालों बाद भी उनके फटने या फिर इधर-उधर होने का दर नही होता है क्योंकि वे अपनी अवस्था में बने रहते है.

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आशुतोष की यूपीएससी स्टूडेंट को सलाह –

आशुतोष यूपीएससी की तैयारी कर रहे दूसरे कैंडिडेट्स को यही सलाह देते हैं कि यूपीएससी परीक्षा में सफलता पाने का केवल एक ही उपाय है ओर वह है रिवीजन, रिवीजन और रिवीजन. आप पढ़े हुए को जितना ज्यादा बार रिवाइज कर सकें, उतना ज़्यादा रिवाइज ज़रूर करें. इसके अलावा आप आंसर राइटिंग और मॉक टेस्ट्स भी अधिक से अधिक दें. इससे आपकी प्रैक्टिस होगी और आप परीक्षा के लिए तय समय के अंदर पेपर खत्म कर पाएंगे.

अपने आंसर्स को हमेशा एनालाइज करें और जहां कही भी कमी हो उसे साथ के साथ दूर करें. वे कहते हैं कि आंसर राइटिंग का हर स्टूडेंट का अपना तरीका होता है और आपका अपना तरीका अधिक प्रैक्टिस से ही इवॉल्व होगा. जहां तक डायग्राम्स बनाने की बात है तो हर उत्तर के साथ डायग्राम बनाने की आवश्यकता नहीं है लेकिन जहां कही भी ज़रूरत महसूस हो इन्हें बनाते रहें.

अंत में आशुतोष यही कहते हैं कि यूपीएससी परीक्षा की यह जर्नी कई बार बहुत लंबी हो जाती है ऐसे में अपने आप को दुनिया से अलग न करें. आप अपना मोटिवेशन ऐसा रखें कि बार-बार असफल होने पर भी वह आपको अपने कदम पीछे न करने दे.

तैयारी के साथ-साथ अपने दोस्तों को और अपनी हॉबीज को भी थोड़ा समय दें पर साथ ही साथ यह ध्यान भी रखें कि सीमा क्रॉस न हो. दिन के आठ से दस घंटे पढ़ने के बाद थोड़ा बहुत समय खुद को रिफ्रेश करने में भी लगाना जरुरी है परंतु पढ़ाई के साथ किसी भी प्रकार का कॉम्प्रोमाइज न करे. मेहनत और धैर्य के साथ अगर आप लगातार पढ़ेंगे तो एक दिन सफल जरूर होंगे.

ओर एक बात ओर आप इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों को शेयर करे ताकि लोग इससे प्रेरणा ले सके.

तो दोस्तों फिर मिलते है एक और ऐसे ही किसी प्रेणादायक शख्शियत की कहानी के साथ…

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