IAS ABHISHEK SURANA : लाखों डॉलर की विदेशी जॉब छोड़कर चुनी UPSC की राह, कुछ ऐसा रहा उनका IAS का सफर

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IAS ABHISHEK SURANA

Success Story Of IAS Abhishek Surana: राजस्थान राज्य के भीलवाड़ा ज़िले के रहने वाले अभिषेक सुराना (IAS ABHISHEK SURANA) ने इतनी कम उम्र में ही इतना कुछ एचीव कर लिया, जिसे पाने का लोग अक्सर सिर्फ़ सपना ही देखते रह जाते हैं. हालांकि  अभिषेक सुराना का एजुकेशनल बैकग्राउंड काफी अच्छा है परंतु इसके बावजूद यूपीएससी में IAS की मंजिल तक पहुंचने में उन्हें चार साल का समय लग गया.

अभिषेक सुराना ने यूपीएससी के अपने चौथे अटेम्पट में दसवीं रैंक के साथ परीक्षा में टॉप किया. इसके पहले भी अभिषेक का यूपीएससी में सिलेक्शन हुआ था परंतु उस समय उनकी रैंक 250 आइ थी ओर इस कारण से उन्हें आईएएस (IAS) सेवा, जिसमें वे जाना चाहते थे नहीं मिल पाई और उस समय तो अभिषेक सुराना ने आईपीएस सेवा चुन ली किंतु आईपीएस की ट्रेनिंग करते हुए ही उन्होंने अगला अटेम्पट दिया.

इस बार के प्रयास में उन्हें 10वीं रैंक हासिल हुई ओर अपनी पसंद का आईएएस ऑफ़िसर का पद भी मिला. अभिषेक सुराना ने अपने इन चार सालों की यूपीएससी की जर्नी के दौरान परीक्षा को अच्छे से समझ लिया था. आज की स्टोरी में जानते हैं कि अभिषेक ने से कैसे प्राप्त की यह सफलता.

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IAS ABHISHEK SURANA की शिक्षा (Education)

अभिषेक का जन्म भीलवाड़ा में हुआ था ओर उनकी स्कूल की शिक्षा भी भीलवाड़ा में ही पूरी हुई. स्कूल की शिक्षा के बाद आगे की हायर स्टडीज के लिए उन्होंने दिल्ली आईआईटी का रुख किया और यहां से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में अपना ग्रेजुएशन कम्प्लीट किया.

जैसा कि सामान्यतः आईआईटी ग्रेजुएट्स छात्रों के साथ होता है, ठीक उसी तरह से अभिषेक सुराना की पढ़ाई पूरी होते ही उन्हें भी विदेश में एक अच्छी हाईपेइंग जॉब मिल गई.

अभिषेक ने डेढ़ साल तक विदेश में नौकरी किंतु इस दौरान उन्हें यह एहसास हुआ कि यह वो क्षेत्र नहीं है जिसमें उनका लंबे समय तक मन लग सके.

इसी एहसास के साथ अभिषेक ने नौकरी छोड़ते हुए दूसरी विदेशी धरती पर ही अपना बिजनेस स्टार्ट किया जिसकी पूरी फंडिग भारत सरकार द्वारा हुई थी.

यह काम भी अभिषेक ने कुछ साल तक किया किंतु इसके बावजूद उन्हें लगा कि उनकी मंजिल यह नहीं है. अभिषेक सुराना अपने देश में आकर ग्रासरूट लेवल पर कुछ करने इच्छा रखते थे.

अंततः अभिषेक ने अपना आख़िरी निर्णय लेते हुए बिजनेस भी छोड़ दिया और सिविल की तैयारी करने का पक्का मन बना लिया.

वे इस बारे में कहते हैं कि उनके इस सफर के दौरान उनकी फैमिली ने उन्हें उनके हर फ़ैसले पर पूरा समर्थन किया. उनके परिवार ने कभी भी उनके किसी भी निर्णय पर शंका नहीं की.

उनके परिवार ने अभिषेक को अपनी अच्छी-खासी नौकरी छोड़ने पर भी कुछ नही कहा ओर उनका समर्थन किया. अभिषेक यूपीएससी की तीययारी करने में लगे रहे परंतु अपने पुराने जीवन में हर क्षेत्र में सफल रहे अभिषेक को यूपीएससी की परीक्षा में सफलता पाने में पहले की तुलना में अधिक समय लगा.

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यूपीएससी प्री को हल्के में न ले

अभिषेक सुराना कहते हैं कि मैंने चार बार प्री की परीक्षा दी और चारों बार उसमें सेलेक्ट हुआ. इन चार सालों के अनुभव से में आज यह कह सकता हूँ कि प्री की परीक्षा पास करने के लिए स्टूडेंट के टेम्परामेंट का बहुत जरूरी रोल होता है. अधिकतर समय यूपीएससी कैंडिडेट पेपर देखकर पैनिक कर जाते हैं और उस स्थिति में वे गलत आंसर मार्क कर देते हैं.

इस स्थिति से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि वे परीक्षा के पहले अधिक से अधिक मॉक टेस्ट दें और यह टेस्ट वे परीक्षा जैसे वातावरण में दें ताकि उनके मन से परीक्षा से सम्बंधित किसी भी प्रकार का डर हो तो वह निकल जाए और वे कंफर्टेबल हो जाएं.

अगर स्टूडेंट ऐसा नही करते है तो भी उन्हें प्री के पहले 15 से 20 मॉक टेस्ट तो जरूर देने चाहिए. आप तैयारी के लिए बाजार से पेपर खरीदें और उसे तय समय के अंदर ही पूरा करें. आपका दिमाग़ वैसे ही रीऐक्ट करता है जैसा आप उससे करवाते है जैसे कि अगर आप दो घंटे के पेपर को तीन या साढ़े तीन घंटे में पूरा करेंगे तो आपका दिमाग भी उसी के लिए प्रोग्राम हो जाएगा.

इसलिए आप परीक्षा के जैसे माहौल में ही परीक्षा दें और पेपर देने के बाद उसे एनालाइज जरूर करें वरना आपके द्वारा की गई सारी मेहनत बेकार चली जाएगी क्योंकि पेपर को एनालाइज करने पर ही आपको अपनी कमियों के बारे में पता चलेगा जिससे कि आप समय रहते दूर कर सके.

प्री की परीक्षा से सम्बंधित एक जरूरी सलाह देते हुए अभिषेक कहते हैं कि इसके सेकेंड पेपर को सिर्फ़ क्वालिफाइंग पेपर मानकर अक्सर कैंडिडेट्स इसे बहुत लाइकली लेते हैं जोकि उनके लिए गलत है. आप यूपीएससी ओर उससे जुड़े हर छोटे से छोटे पेपर को गंभीरता से लें और जहां तक इसमें सफलता प्राप्त करने की बात है तो इसमें वही स्टूडेंट सफल हो सकते हैं जिन्होंने इस परीक्षा के लिए बेसिक्स से तैयारी करते हुए  छोटी से छोटी चीज क्लियर की हो.

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IAS ABHISHEK SURANA का यूपीएससी का अनुभव

अभिषेक कहते हैं कि यूपीएससी प्री पास करने के बाद मेन्स परीक्षा की तैयारी के लिए आपको विस्तार में पढ़ाई की आवश्यकता पड़ती है. इसलिए आप इसकी तैयारी के लिए लिमिटेड किताबें रखें और उन्हीं किताबों को बार-बार पढ़ें. अभिषेक रिवीजन और नोट्स मेकिंग पर भी बहुत अधिक जोर देते हैं.

अभिषेक का कहना है कि आप जो कुछ भी पढ़ें उसे बार-बार रिवाइज ज़रूर करें वरना आपके द्वारा की गई पढ़ाई का कोई लाभ नहीं होगा.

इसी तरह अगर आपको पढ़ा हुआ अच्छे से समझ आये ऐसे नोट्स भी बनाएं, आपके नोट्स सरल ओर सुव्यवस्थित होने चाहिए क्योंकि यह आपको रिवीज़न करन्ने में बहुत हेल्प करते हैं क्योंकि नोट्स में आपको सारा मैटीरियल एक जगह मिल जाता है. आप चाहे तो नोट्स ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरह से बना सकते हैं.

नोट्स बनाते वक्त इस बात का ध्यान ज़रूर रखें कि नोट्स ऐसे हों, जिनसे आपके द्वारा सम्बंधित विषय को आसानी से रिवाइज किया जा सके.

कई बार कैंडिडेट दो साल तक तैयारी करते हैं ऐसे में उनके नोट्स खुद इतने मोटे हो जाते हैं कि उनके लिए उनका रिवीजन करना संभव ही नहीं हो पाता.

अभिषेक न्यूज पेपर के बारे में सलाह देते हे कि आप न्यूज़पेपर ऑनलाइन ही पढ़े ताकि जरूरी चीजों को तुरंत कही सेव किया जा सके.

अभिषेक आंसर राइटिंग पर भी ज़ोर देते हुए कहते है की अगर आपको यूपीएससी का मेंस निकालना है तो लिखने का अभ्यास बहुत-बहुत जरूरी है. इसके अलावा अभिषेक एथिक्स के पेपर के लिए क्लास ज्वॉइन करने की सलाह भी देते हैं क्योंकि हर बिंदु के बारे में हर कोई अपने आप नहीं सोच सकता.

अभिषेक का कहना है की जब आपकी सारी तैयारी हो जाए तो आप टेस्ट सीरीज ज्वॉइन करिए और निबंध के पेपर के लिए यह बात याद रखिए की आप कभी भी अलग सा विषय चुनने के फेर में न पड़ें, आपका विषय कैसा भी हो किंतु उसके अंदर का मैटीरियल ही आपके लिए मैटर करता है. निबंध लिखते समय बैलेंस्‍ड व्यू रखें.

इंटरव्यू की तैयारी भी ज़रूर करे ओर सम्भव हो सके तो इसके लिए भी कम से कम चार या पांच मॉक दें और इस दौरान एक बात का विशेष ख्याल रखें कि बोर्ड के सामने ब्लफ न करें. उनसे कभी भी झूठ बोलने की कोशिश न करें, क्योंकि अगर आप ऐसा करते है तो तुरंत पकड़ लिए जाएंगे.

अभिषेक अपनी इस आख़िरी सलाह के साथ अपनी बात खत्म करते हैं कि उन्होंने किसी वक्त किसी से सुना था कि जब जिंदगी बहुत कम उम्र में सैटेल और आरामदायक हो जाए तो समझ लो की कहीं कुछ गड़बड़ है. उन्हें स्वयं के संबंध में ही भी कुछ ऐसा ही फील हुआ था इसीलिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर सिविल सेवा के क्षेत्र में आने की योजना बनाई.

हालांकी उनकी इस राह में मुश्किलें बहुत आईं पर इसके बावजूद वे जानते थे कि उन्होंने जो राह उन्होंने चुनी है वहां संघर्ष जरूर है पर आत्म-संतुष्टि भी वहीं है.

ओर एक बात ओर आप इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों को शेयर करे ताकि लोग इससे प्रेरणा ले सके. 

तो दोस्तों फिर मिलते है एक और ऐसे ही किसी प्रेणादायक शख्शियत की कहानी के साथ…

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