MAHESH GUPTA : एक छोटे से गैराज से शुरू हुई कंपनी (KENT RO) से 1000 करोड़ के टर्नओवर तक का सफर

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“हर बड़े कार्य की शुरुआत छोटे स्तर से ही होती है”

MAHESH GUPTA (KENT RO) SUCCESS STORY : आपने अक्सर देखा होगा की हर बड़े कार्य की शुरुआत छोटे स्तर से होती है, ऐसी ही कहानी है KENT RO के चैयरमेन महेश गुप्ता (MAHESH GUPTA) की जिनके द्वारा एक छोटे से गैराज से शुरू की गई कंपनी ने आज बहुत बड़ा रूप ले लिया है जिसका टर्नओवर 1000 करोड़ सालाना है.

किसी व्यक्ति ने सच ही कहा गया है की आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है. ओर आज की सफलता की कहानी भी बिलकुल इसी तथ्य को सही साबित करती है, किसी समय मे महेश गुप्ता ने अपनी निजी जरुरत के लिए एक उपकरण बनाया ओर आज यही देश के करोड़ों लोगों को पीने के लिए शुद्ध जल का विकल्प मुहैया करा रहा है.

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दूषित पानी से बच्चों के बीमार होने पर शुरू हुई केंट आरओ (KENT RO)

महेश गुप्ता के घर में दूषित पानी की सप्लाई से इनके दो छोटे बच्चे बीमार हो गई, इस बात से दुखी होकर उन्होंने अपने घर मे पानी का शुधिकरण यंत्र (वाटर प्यूरीफायर) लगाने का फैसला किया लेकिन उस समय इसके लिए उपलब्ध विकल्पों से वे निराश थे. महेश गुप्ता एक इंजिनियर थे ओर इस कारण इन्होंने खुद ही अपने परिवार के लिए एक बेहतर शुद्ध पानी की प्रणाली विकसित की. ओर आज यही प्रणाली करोड़ों लोगों के घरों तक पहुँचते हुए 1000 करोड़ रुपये के विशाल टर्नओवर के साथ देश की एक लोकप्रिय ब्रांड बन चुकी है.

जी दोस्तों आज हम बात कर रहे हैं देश की सबसे बड़ी वाटर प्‍यूरीफायर कंपनी केंट आरओ सिस्‍टम्‍स लिमिटेड (KENT RO SYSTEM LIMITED) की आधारशिला रखने वाले डॉ महेश गुप्ता के बारे मे. एक आईआईटी इंजीनियर होने के कारण गुप्ता ने कई वर्षों तक आयल इंडस्ट्री में काम किया, ओर उसके बाद इंडस्ट्री में तजुर्बे और पैसे कमाने के बाद उन्होंने कारोबारी जगत में कदम रखने का फैसला लिया.

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MAHESH GUPTA ने 11 साल बाद नौकरी से दिया इस्तीफा

महेश गुप्ता ने देश की महारत्न कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन में उप प्रबंधक के रूप में 11 साल तक काम किया उसके बाद साल 1988 में नौकरी से इस्तीफा देते हुए उन्होंने तेल की गुणवत्ता का परीक्षण करने से संबंधित एक व्यवसाय शुरू किया. शुरुआत में इनकी कंपनी अच्छी चली और इससे प्रेरित होकर उन्होंने 15 लोगों को नौकरी पर रखा, लेकिन धीरे-धीरे उन्हे फायदे की जगह नुकसान होना शुरू हुआ ओर इनकी कंपनी बंद के कगार पर पहुँच गई

महेश गुप्ता ने नुकसान के बावजूद किसी तरह 10 वर्ष तक कंपनी को चलाया ओर इसी दौरान दिल्ली मे वे जिस घर मे रहते थे उसमे पीने के लिए शुद्ध पानी की सप्लाई के अभाव में इनके दोनों बेटे बीमार पड़ गये. इसके बाद महेश गुप्ता ने दूषित पानी को शुद्ध करने के लिए प्‍यूरीफायर लगाने के लिए तमाम मौजूदा कंपनियों से संपर्क किया लेकिन उन्हें उस समय बाजार मे उपलब्ध विकल्पों में काफी खामियां दिखी.

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घर पर विकसित की वाटर प्‍यूरीफायर प्रणाली

अंत में सारे विकल्पों से असन्तुष्ट होकर उन्होंने खुद की एक प्रणाली विकसित करने का फैसला किया और कुछ ही महीनों में एक बेहतर प्रणाली विकसित कर ली. गुप्ता को अपनी इस प्रणाली मे उस समय एक बड़ी कारोबारी संभावना भी नजर आई और अंत में उन्होंने अपनी 5 लाख की बची सेविंग्स से एक आरओ कंपनी (RO COMPANY) की आधारशिला रखी.

शुरुआती समय की मुश्किलों का किया सामना

महेश गुप्ता ने कंपनी की शुरुआत करते हुए दिल्ली के साउथ एक्सटेंशन स्थित अपने घर में ही मौजूद एक छोटे से गैरेज में वाटर प्‍यूरीफायर डिज़ाइन करना आरम्भ किया. इस वाटर प्‍यूरीफायर को डिजाइन करने मे शुरुआत में गुप्ता को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था, इस दौरान इन्हें अकेले ही अपनी दोनों कंपनियों का प्रबंधन करना होता था.

कंपनी की पहले वर्ष में बिक्री भी बेहद निराशाजनक ही रही, ओर बड़े मुश्किल से उनके द्वारा बनाए हुए महज 100 प्‍यूरीफायर ही बाजार मे बिक पाए. इनके द्वारा बनाए वाटर प्‍यूरीफायर की सेल कम होने की सबसे बड़ी वजह यह थी कि इनके प्‍यूरीफायर की कीमत उस समय करीबन 20,000 रुपये थी, वही बाज़ार में अन्य कंपनियों के प्‍यूरीफायर सिर्फ 5000 रुपये में उपलब्ध थे.

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MAHESH GUPTA SUCCESS STORY

अन्य वाटर प्‍यूरीफायर से महंगा

उस समय बाजार में उपलब्ध होने वाले प्‍यूरीफायर पराबैंगनी (यूवी) तकनीक पर आधारित थे, जो पानी में मौजूद बैक्टीरिया को मारते थे  किन्तु वे पानी में घुले हुए कई अन्य हानिकारक तत्वों को इस तकनीक से नहीं हटा सकते थे. किन्तु दूसरी मौजूदा कंपनियों के विपरीत उनके द्वारा विकसित वाटर प्‍यूरीफायर मे इस बात को ध्यान रखते हुए एक बेहतर प्रणाली को विकसित किया गया था. हालांकि इसके निर्माण मे उन्होंने गुणवत्ता के साथ-साथ मूल्य से भी समझौता नहीं किया.

डॉ गुप्ता ने मूल्य कम करने की बजाय अपने प्रोडक्ट की गुणवत्ता को समय के साथ और बेहतर करने पर ध्यान दिया. धीरे-धीरे ग्राहकों को केंट आरओ उत्पाद की श्रेष्ठता का एहसास हुआ और उसके बाद तो इनके वाटर प्‍यूरीफायर की धुआंधार बिक्री शुरू हो गई. इनके उपयोगकर्ताओ ने ही इनके ब्रांड को बढ़ावा देना शुरू किया ओर साल 2010 तक हर साल 2.25 लाख यूनिट की बिक्री के साथ कंपनी का कारोबार 250 करोड़ रुपये का हो गया.

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2010 के बाद उतरे रिटेल बिजनेस मॉडल मे

इससे प्रभावित होकर महेश गुप्ता ने वाटर प्‍यूरीफायर में रिटेल बिजनेस मॉडल की शुरुआत करते हुए साल 2006 से केंट की ब्रांडिंग नए सिरे से शुरू की. उन्होंने इसके लिए डिस्‍ट्रीब्‍यूटर बनाए और कस्‍टमर को बेहतर ऑफ्टर सेल सर्विस का भरोसा दिलाया. हमारे देश में वाटर प्‍यूरीफायर में अर्गनाइज्‍ड इंडस्‍ट्री करीब 65 फीसदी है और इसका साइज करीब 3000 करोड़ रुपए है. इसमें से केंट का मार्केट शेयर 35 फीसदी है.

वर्तमान समय मे केंट आरओ सिस्‍टम्‍स लिमिटेड जीरो डेट कंपनी है. ओर यह कंपनी अपने सोर्स से ही अपनी एक्‍सपेंशन जरूरतें पूरी करने में सक्षम है. नोइडा स्थित अपने उत्पादन प्लांट से कंपनी बांग्लादेश, नेपाल, केन्या सहित सार्क देशों में भीअपने प्रोडक्ट का निर्यात करती है.

केंट आज देश की एक अग्रणी कंपनी का रूप लेते हुए कई करोड़ों का कारोबार कर रही है. गुप्ता ने इस वाटर प्‍यूरीफायर के निर्माण के समय यह कभी नहीं सोचा था कि उनकी निजी जरुरत को पूरा करने हेतु उनका एक छोटा प्रयास एक दिन करोड़ों लोगों की जिंदगी का हिस्सा बनेगा.

ओर एक बात ओर आप इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों को शेयर करे ताकि लोग इससे प्रेरणा ले सके.

तो दोस्तों फिर मिलते है एक और ऐसे ही किसी प्रेणादायक शख्शियत की कहानी के साथ…

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