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Vaibhav Suryavanshi Success Story: 14 साल के लड़के का बिहार के गाँव से IPL तक का सफर

वैभव सूर्यवंशी का परिचय: एक ऐसी कहानी जो पूरी दुनिया देख रही है

एक 14 साल का लड़का, जो बिहार के एक छोटे से कस्बे ताजपुर से आता है। हाथ में बल्ला और आँखों में बेखौफ जुनून लिए इस युवा ने क्रिकेट की दुनिया में वह कर दिखाया है, जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी।

हम बात कर रहे हैं वैभव सूर्यवंशी की, जिनकी Vaibhav Suryavanshi success story आज पूरे भारत में हर युवा और खेल प्रेमी के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बन चुकी है।

IPL 2025 में जब यह युवा खिलाड़ी राजस्थान रॉयल्स (Rajasthan Royals) की जर्सी पहनकर मैदान पर उतरा, तो किसी को अंदाज़ा नहीं था कि इतिहास रचा जाने वाला है।

गुजरात टाइटंस के विश्वस्तरीय गेंदबाजों के सामने वैभव ने महज़ 35 गेंदों में अपना शतक पूरा कर लिया और 38 गेंदों में 101 रनों की नाबाद और तूफानी पारी खेली।

यह पारी सिर्फ एक क्रिकेट का रिकॉर्ड नहीं है; यह एक पिता की अटूट मेहनत, एक गाँव की उम्मीद और एक बच्चे की निडर लगन की कहानी है, जो 2025-2026 की सबसे वायरल और इंस्पायरिंग सक्सेस स्टोरी बन चुकी है।

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पिछला कॉन्टेक्स्ट: कौन हैं वैभव सूर्यवंशी?

वैभव सूर्यवंशी का जन्म 27 मार्च 2011 को बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर में हुआ था। उनके पिता, संजीव सूर्यवंशी, खुद एक होनहार और उभरते हुए क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन संसाधनों की कमी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण वे अपने सपने पूरे नहीं कर सके।

जब वैभव केवल चार साल के थे, तब उनके पिता ने उनके अंदर छिपी असाधारण प्रतिभा को पहचान लिया था।

पिता संजीव ने उसी दिन यह ठान लिया था कि जो सपना वह खुद नहीं जी सके, उसे उनका बेटा पूरा करेगा। घर के बैकयार्ड और छत पर क्रिकेट का अभ्यास शुरू हुआ।

साल 2021 के लॉकडाउन के दौरान, जब पूरी दुनिया घर में बंद थी, तब 10 साल का वैभव अपनी छत पर लगातार घंटों प्रैक्टिस कर रहा था।

जब वैभव 8 साल के हुए, तो पिता ने उन्हें पटना में मनीष ओझा की ‘जेननेक्स क्रिकेट अकादमी’ में दाखिल कराया।

यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। वैभव की ट्रेनिंग और किट का खर्च उठाने के लिए उनके पिता को अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी और मोतीपुर में स्थित अपनी पुश्तैनी ज़मीन तक बेचनी पड़ी।

उनकी माँ रात 3 बजे उठकर उनके लिए खाना बनाती थीं और उनके प्रैक्टिस शेड्यूल का ध्यान रखती थीं। परिवार के इसी सर्वोच्च बलिदान का नतीजा था कि वैभव ने महज़ 12 साल की उम्र में बिहार के लिए रणजी ट्रॉफी में अपना शानदार डेब्यू किया।

ताज़ा जानकारी (2025-26): तोड़े सारे रिकॉर्ड्स और मिला बड़ा सम्मान

साल 2025 और 2026 वैभव के लिए उपलब्धियों का स्वर्णिम काल साबित हुआ है। IPL 2025 के मेगा ऑक्शन में जब राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें ₹1.1 करोड़ में खरीदा, तो वह IPL इतिहास में बिकने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बन गए।

28 अप्रैल 2025 को जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में 210 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए वैभव ने क्रिकेट जगत को हिला दिया।

उन्होंने राशिद खान और मोहम्मद सिराज जैसे दिग्गज गेंदबाज़ों की जमकर धुनाई की और मात्र 35 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। इस तूफानी पारी में 11 गगनचुंबी छक्के और 7 चौके शामिल थे।

इसके साथ ही वह T20 क्रिकेट और IPL के इतिहास में शतक लगाने वाले सबसे कम उम्र (14 साल और 32 दिन) के खिलाड़ी बन गए।

इसके बाद, 2026 की शुरुआत में भारत की अंडर-19 टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए वैभव ने वर्ल्ड कप फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 80 गेंदों में 175 रनों की ऐतिहासिक मैच-विनिंग पारी खेली।

इस पारी में 15 चौके और 15 छक्के शामिल थे। उनके इस असाधारण प्रदर्शन के लिए दिसंबर 2025 में उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ (PMRBP) से सम्मानित किया गया।

हाल ही में (फरवरी 2026), बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें पटना में 50 लाख रुपये का नकद पुरस्कार देकर राज्य का मान बढ़ाने के लिए सम्मानित किया है।

Detailed Analysis: क्या है वैभव सूर्यवंशी की इस सफलता का मुख्य कारण?

वैभव की इस अभूतपूर्व सफलता के पीछे सिर्फ किताबी तकनीक नहीं, बल्कि उनका निडर (fearless) एप्रोच है। क्रीज़ पर आते ही पहली गेंद से आक्रमण करना उनकी खेलने की शैली है।

IPL में अपने डेब्यू मैच की पहली ही गेंद पर छक्का जड़कर उन्होंने दुनिया को अपने इरादे बता दिए थे।

यशस्वी जायसवाल और संजू सैमसन जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने और राहुल द्रविड़ जैसे कोच से मार्गदर्शन प्राप्त करने से उनके खेल में ज़बरदस्त निखार आया है।

इसके अलावा, अंडर-19 स्तर पर कोच मनीष ओझा द्वारा रोज़ाना 600 गेंदें खेलने की कठिन ट्रेनिंग ने उन्हें बड़े मंच के दबाव को झेलने के लिए मानसिक रूप से मज़बूत बनाया।

अपनी क्रिकेट प्रतिबद्धताओं (IPL 2026 और डोमेस्टिक टूर्नामेंट्स) पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित करने के लिए इस 14 वर्षीय स्टार ने इस साल अपनी 10वीं कक्षा (Class 10) की बोर्ड परीक्षा तक छोड़ दी है।

वैभव सूर्यवंशी की सफलता के महत्वपूर्ण बिंदु (Important Points)

  • सबसे तेज़ भारतीय शतक: IPL में 35 गेंदों में शतक लगाकर वैभव ने यूसुफ पठान (37 गेंद) के बरसों पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया।
  • सबसे युवा T20 शतकवीर: 14 साल और 32 दिन की उम्र में शतक लगाकर उन्होंने विजय ज़ोल का राष्ट्रीय रिकॉर्ड ध्वस्त किया।
  • U-19 वर्ल्ड कप के हीरो: 2026 वर्ल्ड कप फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 175 रनों की मैच-जिताऊ पारी।
  • पारिवारिक बलिदान: पिता संजीव का बेटे के लिए अपनी ज़मीन बेचना इस कहानी का सबसे भावुक और प्रेरणादायक हिस्सा है।
  • ऑक्शन स्टार: 13 साल की उम्र में 1.1 करोड़ रुपये में राजस्थान रॉयल्स द्वारा शॉर्टलिस्ट और खरीदे गए।

Public Impact / फायदा-नुकसान

वैभव की यह सफलता भारत के ग्रामीण क्षेत्रों, विशेषकर बिहार के युवाओं के लिए एक बड़ी उम्मीद की किरण बनकर उभरी है।

इस सफलता का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि अब छोटे शहरों के माता-पिता भी अपने बच्चों को खेलों में करियर बनाने के लिए गंभीरता से प्रोत्साहित कर रहे हैं।

बिहार क्रिकेट संघ (BCA) और राज्य सरकार खेल के बुनियादी ढांचे पर अधिक ध्यान देने लगी है।

हालाँकि, इतनी कम उम्र में मिली अपार शोहरत और करोड़ों के कॉन्ट्रैक्ट्स युवा खिलाड़ी पर भारी दबाव भी डालते हैं। 10वीं की बोर्ड परीक्षा छोड़ने का फैसला यह भी दर्शाता है कि पेशेवर खेलों की इस कठिन दुनिया में एकेडमिक पढ़ाई अक्सर पीछे छूट जाती है।

फिर भी, वैभव का परिवार उन्हें ज़मीन से जोड़े रखने और उनका पूरा फोकस खेल पर बनाए रखने का काम बखूबी कर रहा है।

FAQs – Vaibhav Suryavanshi Success Story

Q1. वैभव सूर्यवंशी कौन हैं? वैभव सूर्यवंशी बिहार के ताजपुर (समस्तीपुर) के एक 14 वर्षीय प्रतिभाशाली क्रिकेटर हैं, जिन्होंने राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए IPL इतिहास का सबसे कम उम्र में शतक जड़कर पूरी दुनिया में नाम कमाया है।

Q2. वैभव सूर्यवंशी ने अपना IPL शतक कितनी गेंदों में लगाया? वैभव ने 28 अप्रैल 2025 को गुजरात टाइटंस के खिलाफ महज़ 35 गेंदों में अपना शतक पूरा किया, जो IPL इतिहास का दूसरा सबसे तेज़ और किसी भी भारतीय खिलाड़ी द्वारा लगाया गया सबसे तेज़ शतक है।

Q3. वैभव सूर्यवंशी के पिता का नाम क्या है और उनका क्या योगदान रहा? उनके पिता का नाम संजीव सूर्यवंशी है। एक समय वे खुद क्रिकेटर बनना चाहते थे। बेटे को ट्रेनिंग दिलाने के लिए उन्होंने अपनी ज़मीन बेच दी और अपनी नौकरी तक छोड़ दी।

Q4. वैभव को अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 में क्या उपलब्धि मिली? उन्होंने अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 80 गेंदों पर 175 रनों की शानदार पारी खेली, जिससे भारत ने आसानी से वर्ल्ड कप खिताब जीत लिया।

वैभव सूर्यवंशीनिष्कर्ष

वैभव सूर्यवंशी की Vaibhav Suryavanshi success story सिर्फ एक खेल रिकॉर्ड की किताब तक सीमित नहीं है।

यह कहानी हर उस युवा को सिखाती है कि अगर इरादे फौलादी हों, परिवार का नि:स्वार्थ समर्थन हो और कड़ी मेहनत करने का जज़्बा हो, तो उम्र या संसाधनों की कमी कभी आपकी राह नहीं रोक सकती।

घर की छत पर प्लास्टिक की गेंद से प्रैक्टिस करने से लेकर IPL में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ों के छक्के छुड़ाने तक का यह सफर अद्भुत है।

हमें पूरी उम्मीद है कि बिहार का यह युवा सितारा आने वाले समय में सीनियर भारतीय टीम के लिए भी ऐसे ही कई और ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित करेगा।