AIDS : जानिए कैसे बिना किसी दवा या थैरेपी के महिला हो गई थी HIV मुक्त, हैरान थे वैज्ञानिक भी

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आपने आज तक सिर्फ़ यही सुना होगा कि HIV AIDS का कोई इलाज नहीं है लेकिन अर्जेंटीना की एक महिला के HIV मुक्‍त होने पर वैज्ञानिक भी हैरान थे.

वर्तमान समय में दुनियाभर में 4 करोड़ से अधिक मरीज HIV AIDS से जूझ रहे हैं. वर्ष 2022 में एड्स (AIDS) से दुनियाँ भर में लगभग 630,000 मरीजों ने दम तोड़ा. अगर आपको यह आंकड़े चौंका रहे हैं तो इन आंकड़ों के बीच HIV के ऐसे मामले के बारे में भी जानिए जिसने दुनियाभर के वैज्ञानिकों को भी चौंका दिया था. यह एकमात्र ऐसा मामला है जो वैज्ञानिकों के बीच रिसर्च का विषय बन गया था.

यह मामला था अर्जेंटीना की रहने वाली एक महिला का. इसमें सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिस HIV IADS का वैज्ञानिक आज तक सही इलाज नहीं ढूँढ पाये है, वह वायरस उस महिला में अपने आप खत्म हो गया था. अर्जेंटीना की उस महिला पर हुई रिसर्च में वैज्ञानिकों के सामने जो बातें आईं वो आगे चलकर आर्काइव्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन में दर्ज हुईं.

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HIV AIDS का क्या था पूरा मामला?

जर्नल में पब्लिश हुई रिपोर्ट के अनुसार, उस महिला ने बिना किसी थैरेपी (ART) या दवाई के ही एचआइवी (HIV) से छुटकारा पा लिया था. यह दुनिया का ऐसा दूसरा मामला था. यह महिला पिछले करीब 8 साल से भी अधिक समय से एचआइवी (HIV) से जूझ रही थी, लेकिन उसके बावजूद भी उसने किसी तरह की कोई थैरेपी नहीं ली. बाद में वैज्ञानिकों ने उसके ऊपर रिसर्च करने के लिए एक अरब से ज्यादा कोशिकाओं की जांच की. इस जांच में किसी भी प्रकार के HIV संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई.

क्यों खत्म हुआ HIV वायरस?

एचआईवी (HIV) की स्थिति में वायरस उस मरीज के इम्यून सिस्टम को प्रभावित करता है और उसे कमजोर करता है. जिसके परिणामस्वरूप व्यक्ति की रोगों से लड़ने की क्षमता घटती है. और उसका नतीजा यह होता है कि ऐसे मरीजों में संक्रमण का खतरा बढ़ता है.

अर्जेंटीना की इस महिला मरीज में HIV के ठीक होने में उसका इम्यून सिस्टम ही सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट था. बीबीसी (BBC) की रिपोर्ट में विशेषज्ञों का कहना था कि इस महिला मरीज का इम्यून सिस्टम यानी की रोगों से लड़ने वाला सिस्टम ऐसा था कि उसने स्वयं से ही वायरस को खत्म कर दिया.

इस बारे में जिक्र करते हुए बीबीसी (BBC) द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में कुछ ऐसे मरीज भी मिले हैं जिनका इम्यून सिस्टम प्राकृतिक रूप से ही HIV संक्रमण से लड़ने में समर्थ है. किंतु ऐसे लोगों की संख्या बहुत ही कम है. बहुत कम लोगो में ही ऐसे जीन्स मिले जो HIV के संक्रमण को रोकने का काम करते हैं. विशेषज्ञों को उम्मीद हैं कि इन मरीजों पर रिसर्च करके बाकी गंभीर HIV रोगियों के इलाज में मदद मिलेगी.

आपको बता दी कि अब तक HIV वायरस से लड़ने के किसी भी प्रकार का कोई भी प्रभावी इलाज मौजूद नहीं है. हालांकि, ऐसे विकल्प ज़रूर मौजूद हैं जो इससे पीड़ित रोगी को लंबा जीवन जीने में मदद कर सकते हैं. इसके इलाज के लिये कुछ ऐसे ड्रग्स और थैरेपी उपलब्ध हैं, जिनसे HIV को काफ़ी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है.

इनमें से एंटी-रेट्रोवाइरल थेरेपी (ART) भी है. लेकिन HIV से पीड़ित मरीज को अपनी पूरी ज़िंदगी इनकी मदद लेनी पड़ती है. क्योंकि इन थेरेपी और दवाईयों इस्तेमाल छोड़ने के कुछ समय बाद ही यह वायरस फिर ताकतवर हो जाता है.

HIV और AIDS में क्या अंतर है? (DIFFERENCE BETWEEN HIV AND AIDS)

क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के अनुसार, आमतौर पर लोग एचआईवी और एड्स को एक ही समझ लेते हैं, किंतु एचआईवी (HIV) और एड्स (AIDS) में फर्क होता है. HIV एक वायरस है जो पीड़ित मरीज के रोगों से लड़ने वाले इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है. किंतु एड्स वो स्थिति होती है जब व्यक्ति एचआईवी पॉजिटिव हो जाये.

एचआईवी (HIV) ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस है, कोई व्‍यक्ति अगर इससे एक बार संक्रमित हो जाए तो वह फिर से रिकवर नहीं हो सकता. लेकिन ऐसे मरीज़ दवाओं के द्वारा इसे खतरनाक स्थिति तक पहुंचने से रोक सकते हैं.

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