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Bank Locker Charges 2026: बैंक लॉकर में जेवर रखना कितना सुरक्षित है — 2026 के नए नियम, असली शुल्क और वो सच जो बैंक आपको नहीं बताता!

Bank Locker Charges 2026: लखनऊ की मीना श्रीवास्तव के परिवार में पीढ़ियों से चला आ रहा सोने का हार था। शादी-ब्याह में पहना जाता, त्योहारों पर निकाला जाता।

घर में रखना सुरक्षित नहीं लगता था, तो दस साल पहले उन्होंने बैंक लॉकर किराए पर लिया। मन में चैन था — बैंक में है, सुरक्षित है।

लेकिन पिछले साल जब उनकी पड़ोसी के लॉकर से गहने गायब हुए और बैंक ने मात्र ₹3,000 का मुआवजा दिया — जबकि गहनों की कीमत ₹8 लाख थी — तब मीना जी को असलियत पता चली।

यही वह सच है जो लाखों लॉकर धारकों को नहीं पता। बैंक लॉकर सुरक्षित जरूर है, लेकिन इसकी जिम्मेदारी की सीमा आपकी सोच से कहीं कम है।

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इस रिपोर्ट की मुख्य बातें — पढ़ने से पहले एक नजर

📌 28 फरवरी 2026 — नया लॉकर समझौता-पत्र भरने की अंतिम तिथि। नहीं भरा तो लॉकर बंद हो सकता है।

📌 100 गुना मुआवजा — बैंक की लापरवाही से नुकसान पर सालाना किराए का 100 गुना ही मिलेगा। ₹3,000 किराए पर अधिकतम ₹3 लाख।

📌 18% जीएसटी — लॉकर किराए पर अलग से लगता है। जो दाम दिखते हैं वह अंतिम नहीं हैं।

📌 4 नामांकन — बैंकिंग कानून 2025 के बाद अब चार लोगों को नामांकित कर सकते हैं।

📌 नकद रखना मना — भारतीय रिजर्व बैंक ने लॉकर में नकद रखने पर सख्त रोक लगाई है।

📌 प्राकृतिक आपदा — बाढ़, भूकंप में नुकसान हो तो बैंक जिम्मेदार नहीं — अलग बीमा जरूरी है।

Bank Locker Charges : एक नजर में — 2026 के लॉकर नियम

बातजानकारी
समझौता-पत्र की अंतिम तिथि28 फरवरी 2026
बैंक की अधिकतम जिम्मेदारीसालाना किराए का 100 गुना
मुफ्त वार्षिक दौरे12 (अधिकांश बैंकों में)
नामांकन की नई सीमा4 व्यक्ति तक
जीएसटीकिराए पर 18% अतिरिक्त
लॉकर में नकद रखनासख्त मना

Bank Locker Charges 2026: 28 फरवरी 2026 — एक महत्वपूर्ण समय सीमा

भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंक लॉकर के नए ‘मॉडल लॉकर समझौते’ पर हस्ताक्षर करने की अंतिम तिथि 28 फरवरी 2026 तय की है। जिन लॉकर धारकों ने अभी तक यह नया समझौता-पत्र नहीं भरा, उनका लॉकर बंद किया जा सकता है।

यह समझौता इसलिए जरूरी है क्योंकि इसमें पहली बार बैंक की जिम्मेदारी को कानूनी रूप से परिभाषित किया गया है। दशकों तक बैंक यह कहते थे कि लॉकर की सामग्री पूरी तरह ग्राहक के जोखिम पर है। नया समझौता इस धारणा को बदलता है।

अच्छी खबर यह है कि अब अधिकांश बैंकों ने आधार-आधारित ई-हस्ताक्षर की सुविधा दी है। एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा समेत कई बैंकों में अपने बैंकिंग ऐप से 60 सेकंड में घर बैठे हस्ताक्षर हो सकते हैं — शाखा जाने की जरूरत नहीं।

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Bank Locker Charges: असली शुल्क कितना है — बैंक-वार और आकार-वार पूरा हिसाब

बैंक लॉकर का किराया दो चीजों पर निर्भर करता है — लॉकर का आकार और शाखा की स्थिति। महानगर और शहरी शाखाओं में किराया ग्रामीण शाखाओं से अधिक होता है। और इस पर 18 प्रतिशत जीएसटी अलग से लगता है।

एसबीआई (भारतीय स्टेट बैंक)

आकारमहानगर/शहरीग्रामीण/अर्धशहरी
छोटा₹2,000₹1,500
मध्यम₹4,000₹3,000
बड़ा₹8,000₹6,000
अतिरिक्त बड़ा₹12,000₹9,000

(+ 18% जीएसटी अलग से)

एसबीआई लॉकर देते समय तीन साल के किराए के बराबर सावधि जमा माँगता है जो सुरक्षा के तौर पर रहती है।

एचडीएफसी बैंक

एचडीएफसी का किराया ₹1,350 से ₹20,000 प्रति वर्ष तक है। महानगरों में मध्यम लॉकर का किराया ₹3,000, बड़े का ₹7,000 और अतिरिक्त बड़े का ₹15,000 है। ग्रामीण शाखाओं में अतिरिक्त छोटा लॉकर मात्र ₹550 में मिलता है।

आईसीआईसीआई बैंक

आकारकिराया (प्रति वर्ष)
छोटा₹1,200 — ₹5,000
मध्यम₹2,500 — ₹9,000
बड़ा₹4,000 — ₹15,000
अतिरिक्त बड़ा₹10,000 — ₹22,000

पंजाब नेशनल बैंक

ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में सालाना किराया ₹1,250 तक है। महानगरों में ₹2,000 से ₹10,000 तक।

जरूरी बात: ये सभी दरें मूल किराए की हैं। इन पर 18% जीएसटी अलग से जुड़ेगा। साथ ही एक बार पंजीकरण शुल्क ₹500 से ₹1,000 तक अलग से लग सकता है।

Bank Locker Charges 2026: सालाना किराए के अलावा और क्या-क्या शुल्क लगते हैं?

बहुत से लोग सोचते हैं कि सालाना किराया देने के बाद कोई और खर्च नहीं। यह धारणा गलत है।

अधिकांश बैंक साल में 12 मुफ्त दौरे देते हैं। इससे अधिक जाने पर प्रति दौरा ₹100 से ₹150 और जीएसटी देना पड़ता है। इंडियन ओवरसीज बैंक जैसे कुछ बैंकों में यह शुल्क ₹45 प्रति अतिरिक्त दौरा है।

किराया समय पर न देने पर जुर्माना अलग होता है। तीन साल तक किराया न भरा तो बैंक लॉकर तोड़कर सामान जब्त कर सकता है — पहले नोटिस देकर।

लॉकर जबरन खोलने का खर्च भी ग्राहक से वसूला जाता है।

Bank Locker Charges 2026: वह सच जो बैंक नहीं बताता — 100 गुना मुआवजे की असलियत

यह वह जानकारी है जो हर लॉकर धारक को पहले दिन ही मिलनी चाहिए।

भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार अगर बैंक की लापरवाही, धोखाधड़ी, आग, चोरी या डकैती की वजह से लॉकर की सामग्री नष्ट या गायब होती है, तो बैंक सालाना किराए का अधिकतम 100 गुना मुआवजा देगा।

यानी अगर आपका सालाना किराया ₹3,000 है तो अधिकतम मुआवजा होगा — ₹3,00,000।

लेकिन असली समस्या यहाँ शुरू होती है। Business Standard में प्रकाशित विशेषज्ञों की राय के अनुसार आज के सोने के भाव में एक साधारण परिवार का लॉकर ₹10 लाख से ₹20 लाख तक के गहने रख सकता है। उस पर मुआवजा मिलेगा मात्र ₹3 लाख।

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता तुषार कुमार का कहना है कि “यह सीमा अक्सर असली नुकसान का 20-30 प्रतिशत भी नहीं कवर करती।”

दो और बातें जो ध्यान रखनी हैं। पहली — भूकंप, बाढ़ या बिजली गिरने जैसी प्राकृतिक आपदाओं में हुए नुकसान पर बैंक की कोई जिम्मेदारी नहीं। दूसरी — बैंक आपके लॉकर की सामग्री का बीमा नहीं करता।

तो फिर लॉकर का असली हल क्या है?

विशेषज्ञों की सलाह एकमत है — लॉकर में रखी वस्तुओं का अलग से बीमा करवाएँ।

बाजार में ‘मूल्यवान वस्तु बीमा’ यानी Valuables Insurance Policy उपलब्ध है। इसे होम इंश्योरेंस के साथ ऐड-ऑन के रूप में भी लिया जा सकता है। इसमें गहनों की पूरी बाजार कीमत तय होती है और चोरी, आग या किसी भी नुकसान पर पूरा मुआवजा मिलता है।

अगर लॉकर में ₹10 लाख के गहने हैं तो सालाना बीमा प्रीमियम ₹1,500 से ₹3,000 तक हो सकता है — यह निवेश सालाना किराए से भी कम है।

Bank Locker Charges 2026 New Rule: — अब 4 लोगों को नामांकन दे सकते हैं

बैंकिंग कानून संशोधन अधिनियम 2025 के तहत अब लॉकर में अधिकतम चार लोगों को नामांकित किया जा सकता है। पहले यह सीमा एक या दो थी।

यह बदलाव उन परिवारों के लिए बड़ी राहत है जिनके लॉकर में पीढ़ियों की संपत्ति रखी है। लॉकर धारक की मृत्यु की स्थिति में नामांकित व्यक्ति को सामग्री निकालने का अधिकार मिलता है — वरना बैंक में महीनों तक कानूनी पेचीदगी चलती है।

अगर आपने अभी तक नामांकन नहीं करवाया या पुराना नामांकन अपडेट नहीं किया, तो अगली बार शाखा जाने पर यह काम जरूर करें।

बैंक लॉकर में क्या रखें — क्या नहीं?

बैंक लॉकर में क्या रख सकते हैं

सोना-चाँदी के गहने, हीरे और अन्य कीमती पत्थर, सम्पत्ति के कागजात, वसीयत, पासपोर्ट, बीमा पॉलिसी, शेयर प्रमाण-पत्र और अन्य मूल्यवान दस्तावेज।

बैंक लॉकर में क्या बिल्कुल नहीं रख सकते

नकद रुपये — भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंक लॉकर में नकद रखने पर सख्त रोक लगाई है। इसके अलावा हथियार, विस्फोटक पदार्थ, खतरनाक रसायन, अवैध वस्तुएँ और ऐसी कोई भी चीज जो अन्य ग्राहकों या बैंक के लिए परेशानी का कारण बने।

बैंक आपके लॉकर की सामग्री की सूची नहीं रखता। आपकी निजता सुरक्षित रहती है। लेकिन यही वजह है कि मुआवजा किराए से जोड़ा गया है, न कि सामग्री की असली कीमत से।

बैंक लॉकर मिलता कैसे है — पूरी प्रक्रिया

लॉकर पाना इतना आसान नहीं जितना लगता है। महानगरों में लॉकर की भारी कमी है और प्रतीक्षा सूची लंबी हो सकती है।

अपने बैंक की शाखा में जाएँ और लॉकर उपलब्धता पूछें। आवेदन पत्र भरें। केवाईसी दस्तावेज दें — आधार, पैन और पासपोर्ट आकार की फोटो। नामांकन पत्र भरें — अभी से चार लोगों का नाम दे सकते हैं। समझौता-पत्र पर हस्ताक्षर करें और किराया अग्रिम भुगतान करें।

कुछ बैंकों में लॉकर के साथ सावधि जमा भी करनी होती है। एसबीआई तीन साल के किराए के बराबर एफडी माँगता है। लॉकर छोड़ने पर यह एफडी वापस मिल जाती है।

बैंक लॉकर किराए में बचत के तरीके

सालाना किराया सस्ता पाना चाहते हैं तो कुछ बातें ध्यान रखें।

ग्रामीण या अर्धशहरी शाखाओं में किराया शहरी शाखाओं से काफी कम होता है। अगर नजदीक ऐसी शाखा हो तो वहाँ लॉकर लेना फायदेमंद है।

आकार के हिसाब से सोचें। बहुत से लोग बड़ा लॉकर लेते हैं जबकि छोटे में काम चल जाता। एक साल के किराए में ₹2,000 से ₹5,000 तक की बचत हो सकती है।

12 मुफ्त दौरों का सही उपयोग करें। हर छोटे काम के लिए बैंक न जाएँ — एक बार में जाकर सभी काम निपटाएँ।

बैंक लॉकर (Bank Locker) बंद करना है — तो यह प्रक्रिया पहले जान लें

बहुत से लोग लॉकर बंद करते समय गलतियाँ करते हैं और बाद में किराए की रिकवरी का नोटिस आता है। सही तरीका जानना जरूरी है।

पहला कदम — लिखित आवेदन दें। लॉकर बंद करने के लिए मौखिक सूचना काफी नहीं है। अपनी होम शाखा में जाकर लिखित आवेदन देना अनिवार्य है। आवेदन में लॉकर नंबर, खाता संख्या और कारण लिखें।

दूसरा कदम — सामान बैंक अधिकारी की मौजूदगी में निकालें। लॉकर खाली करते समय बैंक अधिकारी का उपस्थित रहना जरूरी है। अकेले सामान न निकालें — बाद में विवाद हो सकता है।

तीसरा कदम — सभी बकाया पहले चुकाएँ। लॉकर बंद करने से पहले किराया, जुर्माना या कोई भी बकाया राशि चुका दें। बकाया रहने पर लॉकर बंद नहीं होगा।

चौथा कदम — चाबी वापस करें और रसीद लें। दोनों चाबियाँ बैंक को सौंपें और उसकी लिखित रसीद अवश्य लें। यह रसीद भविष्य में किसी भी विवाद में काम आती है।

पाँचवाँ कदम — रिफंड की माँग करें। अगर आपने पूरे साल का किराया अग्रिम दिया था और बीच में लॉकर बंद कर रहे हैं, तो बचे हुए महीनों के किराए का रिफंड माँगें। भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार यह रिफंड आपका अधिकार है।

⚠️ महत्वपूर्ण: अगर तीन साल से किराया नहीं भरा और बैंक से संपर्क नहीं हुआ, तो बैंक नोटिस देकर लॉकर जबरन खुलवा सकता है। इस प्रक्रिया का पूरा खर्च — ₹1,000 से ₹3,000 तक — आपके खाते से काटा जाएगा।

एक जरूरी चेतावनी — लॉकर के नाम पर ठगी

लॉकर के नाम पर भी धोखाधड़ी होती है। अनजान व्यक्ति बैंक अधिकारी बनकर फोन करता है और कहता है — “आपके लॉकर समझौते की केवाईसी अपडेट करनी है” या “समय सीमा खत्म होने से पहले आधार दें।”

किसी भी अनजान फोन पर आधार नंबर, पैन, ओटीपी या बैंक खाते की जानकारी न दें। बैंक का कोई भी असली अधिकारी फोन पर यह जानकारी नहीं माँगता।

समझौता-पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए सीधे अपनी शाखा जाएँ या अपने बैंकिंग ऐप का उपयोग करें।

Bank Locker Charges से संबंधित पाठकों के सामान्य सवाल

क्या लॉकर बंद करने पर पैसे वापस मिलते हैं?
हाँ। लॉकर बंद करने पर बचे हुए समय का किराया वापस किया जाता है। लॉकर खाली करें, चाबी वापस दें और समझौता रद्द करवाएँ। अगर बैंक खाते से लॉकर जुड़ा था तो खाता भी बंद करवा सकते हैं।

क्या साझा लॉकर लिया जा सकता है?
हाँ। संयुक्त लॉकर में दो या अधिक लोग हो सकते हैं। दोनों या किसी एक के हस्ताक्षर से लॉकर खुल सकता है — यह समझौते में तय होता है।

अगर चाबी खो जाए तो?
तुरंत बैंक को सूचित करें। बैंक लॉकर के ताले और चाबी बदलता है। इसका खर्च ग्राहक को देना पड़ता है।

क्या मोबाइल से लॉकर किराया भर सकते हैं?
हाँ। एसबीआई के लिए योनो ऐप, एचडीएफसी के लिए एचडीएफसी मोबाइल बैंकिंग — अधिकांश बैंकों में नेट बैंकिंग या ऐप से किराया भुगतान होता है।

सात साल से लॉकर इस्तेमाल नहीं किया तो क्या होगा?
अगर किराया नियमित भरा जा रहा है लेकिन लॉकर सात साल से खुला नहीं और बैंक मालिक से संपर्क नहीं कर पाया, तो बैंक नामांकित व्यक्ति को सूचित करता है। नामांकन न हो तो बैंक लॉकर तोड़ता है।

प्राकृतिक आपदा में नुकसान हो तो?
बाढ़, भूकंप या बिजली गिरने से नुकसान में बैंक जिम्मेदार नहीं है। इसीलिए अलग से बीमा जरूरी है।

अंत में

मीना श्रीवास्तव ने जब यह सब जाना, तो उन्होंने दो काम किए। पहला — अपने लॉकर के गहनों का अलग से बीमा करवाया। दूसरा — चार परिवार के सदस्यों को नामांकित किया ताकि भविष्य में कोई परेशानी न हो।

बैंक लॉकर सुरक्षित है — लेकिन ‘पूरी तरह सुरक्षित’ नहीं। भारतीय रिजर्व बैंक के 2026 के नए नियमों ने बैंकों की जिम्मेदारी तय जरूर की है, लेकिन वह जिम्मेदारी आपकी संपत्ति की असली कीमत से बहुत कम है।

28 फरवरी 2026 से पहले नया समझौता-पत्र जरूर भरें। नामांकन अपडेट करें। और अगर गहनों की कीमत लॉकर किराए के 100 गुने से ज्यादा है — तो बीमा जरूर लें।

यह लेख अपने उन परिजनों को जरूर भेजें जिनका बैंक में लॉकर है — खासकर बुजुर्ग माता-पिता को जो शायद अभी तक इस सच से अनजान हैं।

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